जिस प्रकार से हमारी भावनाए हमारी संवेदनाओं की प्रतीक होती है उसी प्रकार से नभ में उड़ते पंछी गण से नदी एवं सरोवर में बहती मछलियां से उद्यान में उड़ती तितलियों से प्रकृति की संवेदनाएं प्रकट होती है परिलक्षित होती है
तितलियां बगीचों की शोभा है l सौंदर्य की चेतना है l जिस प्रकार गुणों का पारखी न हो तो गुणों का कोई मूल्य नहीं है उसी प्रकार तितलियां और भ्रमर न हो तो फूलों के सौन्दर्य और सौरभ कोई मूल्य नहीं है l फूलों का सौरभ कभी भी शहद नहीं पायेगा
फूलों के जितने रंग होते हैं तितलियां भी उतनी ही रंग बिरंगी होती है l कब लार्वा से प्यूपा और प्यूपा से तितली बन जाये पता ही नहीं चलता l
तितलियां अल्पजीवी होती है l वह जीवन की क्षण भंगुरता की निरन्तर याद दिलाती है l तितली की कोमल काया जब किसी फूल की कोमल पंखुड़ियों से टकराती है तो आह नहीं होती उसका सुखद स्पर्श फूल पाकर अधिक प्रफुल्लित और सुरभित हो उठता है.
तितली का चंचल और अल्हड स्वभाव देख कर यह मन भी तितली होना चाहता है l तितलियों में यह क्षमता होती है कि फूल पत्तों डालियों में स्वयं को छुपा ले l
तितलियां उद्यान की प्रमुख शोभा होती है l जिस उद्यान में तितलियां दिखाई देती है वह इस तथ्य को दर्शाता है कि वहां रासायनिक उर्वरकों का और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया गया होगा l
तितलियां हमारे पर्यावरण की संकेतक है l जो यह संकेत देती है l प्रकृति में मानव का हस्तक्षेप नियंत्रित है l प्रकृति ने अपनी मौलिकता को बचाए रखा है l
तितली का जीवन अनुपम है अद्भुत है तितली बिना शोर गुल निकल जाती है और बिना शोर गुल किए आ जाती है l तितलियों के इस मौन ने कुछ कहा है l तितलियों ने कभी घनघोर बारिश और कभी कड़ी सर्दी को सहा है l
ये सच है कि बारिश में तितलियां अधिक दिखाई देती है l परंतु हर मौसम में एक अलग प्रजाति की तितली होती है l तितली ने नीरस वातावरण को सरस बनाया है l तितलियों के मौन को कौन सुन पाया है
हम भले ही तितलियों के उद्यान बना ले l लेकिन अधिक मानवीय हस्तक्षेप उनके अनुकूल नहीं होने से वे अधिक समय तक जीवित नहीं रह पाएगी