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Tuesday, March 17, 2020
सत्संग का लाभ
Tuesday, December 4, 2018
जीवन और मृत्यु
मरना एक न एक दिन सभी को है
परंतु जीवन और मृत्यु उद्देश्य पूर्ण हो तो
उसका जीना सार्थक है मरना भी सार्थक है निरुद्देश्य जीवन और दुर्घटना से हुई मृत्यु में
कोई अंतर नही है
कोई परोपकार समाज सेवा
देश धर्म के लिए जीवन जीता है तो
कोई मात्र स्वार्थ पूर्ति के लिए जीता है
कोई बीमार होकर रुग्ण शैय्य्या पर
दुर्घटना में घायल होकर मरता है
तो कोई देश की सीमा पर लड़ते लड़ते है
अपने कर्तव्य की पूर्ति में मरता है
उसे इतिहास याद रखता है
डरना मना है उस मृत्यु से जो आकस्मिक दुर्घटना से हो सकती है कभी कभी दुर्घटनाये होती नही आमंत्रित की जाती है आकस्मिक हुई दुर्घटना से हुई मृत्यु उद्देश्य पूर्ण जीवन का समापन है निरुद्देश्य जीने वाले को इससे कोई फर्क नही पड़ता ।कई बार जीवन भी मृत्यु से भयावह हो सकता है ऐसा तब होता है जब व्यक्ति का आत्म विश्वास बुरी तरह से टूट जाता है परस्पर रिश्तो का विश्वास चकनाचुर हो जाता है व्यक्ति की प्रतिष्ठा और धन नष्ट हो जाता है व्यक्ति का चरित्र समाप्त हो जाता है व्यक्ति विवेक और ज्ञान शून्य हो जाता है तब ऐसा व्यक्ति आत्मघाती कदम उठा लेता है और यही आत्महत्या का कारण भी होता है
Saturday, November 24, 2018
संयुक्त परिवार
संयुक्त परिवार धीरे धीरे विघटित होते जा रहे है वैसे वैसे सामाजिक समस्याएं विकराल होती जा रही है| परम्पराये संस्कार विलुप्त होते जा रहे है आज भी मझौले शहरों में और ग्रामीण क्षेत्रों में संयुक्त परिवारों का कही कही अस्तित्व दिखाई देता है तो सुखद अनुभूति होती है संयुक्त परिवारों में एक प्रकार का अनुशासन दिखाई देता है |छोटे सदस्यों का बड़ो के प्रति आदर का भाव बड़ो का छोटे सदस्यों के प्रति स्नेह आशीष और सरंक्षण दृष्टिगत होता है|भारतीय संस्कृति और सस्कारो अस्तित्व बहुत हद तक संयक्त परिवारों से जुड़ा हुआ है जैसे जैसे संयुक्त परिवार विघटित होते जा रहे है|व्यक्ति आत्म केंद्रित होता जा रहा है तलाक और गृह कलह जैसे परिस्थितिया निर्मित होती जा रही है| संयुक्त परिवार में कार्य का विभाजन मह्त्वपूर्ण कारक होता है|आर्थिक और सामजिक विषयो में घर के वरिष्ठ सदस्य के निर्णयो को अधिक महत्व दिया जाता है उनके मत को बहुत अधिक गंभीरता से सूना जाता है क्रियान्वित किया जाता है संयुक्त परिवारों में व्यवसाय हेतु पूंजी का अभाव नहीं रहता है क्योकि प्रत्येक सदस्य की थोड़ी थोड़ी पूंजी मिल कर व्यवसायिक आवश्यकता हेतु वृहत रूप धारण कर लेती है सभी सदस्यों के पास आभूषण और वस्त्र समान रूप से विध्यमान रहते है किसी के पास अधिक हो तो दूसरी महिला सदस्य उसका उपयोग कर लेती है किसी सदस्य के रुग्ण होने पर उसके उपचार की व्यवस्था स्वतः हो जाती है परिवारमें विपत्ति आती है सभी महिलाये उनके पास विध्यमान आभूषणों को परिवार के हित के लिए अर्पित कर देती है कमजोर सदस्य को आर्थिक और सामजिक सुरक्षा की आश्वस्ति रहती है संयुक्त परिवार प्रबंधन के जीवंत उदाहरण है महाभारत हो या रामायण दैत्य हो दानव प्राचीन भारतीय परिस्थितियों में संयुक्त परिवार की अवधारणा को सभी ने अपनाया है संयुक्त परिवार के माध्यम से अपने परिवार समाज राज्य को समृध्द और पुष्ट बनाया है कई प्रकार के प्रतिरोधों का सामना किया है पर संयुक्त परिवार वह कवच रहा है जहा से परिवार समाज राज्य ने पुनः अपना सामर्थ्य पाया है|
Monday, September 3, 2018
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व
Wednesday, August 15, 2018
भगवान् शिव के गले में नाग क्यों?
भगवान विष्णु शेषनाग पर विश्राम क्यों करते है
इसके पीछे क्या दर्शन है
परन्तु इन तथ्यों तरफ किसी ने ध्यान ही दिया
Friday, July 20, 2018
मै उसे पूजन कहूंगा
Listen to जो मरण को जन्म समझे मैं उसे जीवन कहूँगा -स्व.हरिनारायण शर्मा" निर्भीक" by Rajendra Sharma #np on #SoundCloud https://soundcloud.com/rajendra-sharma-7/tut9e347pill
Wednesday, July 18, 2018
धार्मिक या धर्मांध
Friday, May 11, 2018
आत्म तत्व और मंत्र शक्ति
मंत्र जीवित रहते व्यक्ति की आत्म बल को बढ़ाता है
परन्तु व्यक्ति के मृत हो जाने के बाद भी उसका प्रभाव आत्मा के साथ बना रहता है किसी भी मंत्र का जप नियमित रूप से दीर्घ अवधि तक किया जाता है तो वह आत्मा का संस्कार बन जाता है देह की अचेतन अवस्था मे वह आत्मा के पंख की तरह क्रियाशील हो जाता है आत्मा मंत्र रूपी पंखो के सहारे इच्छित दिशा में चलायमान होने में समर्थ होती है वह स्वयं के निर्णय लेने में समर्थ रहती है नकारात्मक शक्तियां मंत्र शक्ति से परिपूर्ण आत्मा को प्रभावित नही कर सकती है इसलिए जीवन मे नियमित मंत्र जाप अत्यंत उपयोगी है
Friday, October 28, 2016
माँ शारदा का वाहन हंस क्यों है ?
Wednesday, June 22, 2016
स्वाध्याय
Friday, February 20, 2015
श्रीराम और श्रीकृष्ण में भेद
कि वे सामान्य मनुष्य नहीं ईश्वर है
Sunday, June 8, 2014
वामन अवतार में जीवन दर्शन
Wednesday, October 30, 2013
महा सरस्वती ,महालक्ष्मी , महाकाली
Tuesday, August 6, 2013
माँ दुर्गा में निहित जीवन के सूत्र
माँ दुर्गा जिनकी नवरात्रि में आराधना की जाती है
किया गया
का भी देवी दुर्गा द्वारा संहार किया गया
Sunday, December 23, 2012
भाग्य और पुरुषार्थ
Friday, May 4, 2012
पांडव भ्राता एवं परिवार प्रबंधन
Wednesday, January 11, 2012
ब्रह्मा जी एवम जीवन के सूत्र
Tuesday, December 27, 2011
त्रिदेव एवम जीवन दर्शन
किन्तु यह उनके कार्यो का अधूरा परिचय है
दुसरे स्थान पर विष्णु का सम्बन्ध कर्म से होता है
भगवान शिव सहिष्णुता तथा उत्तरदायित्व,प्रबंधन के देवता है
जहा तक सहिष्णुता का बात की जाय शिव जी जैसा सहिष्णु देव मिलना असम्भव है
किन्तु शिव जी को उनके ससुराल में सार्वजनिक रूप से ससुर द्वारा अपमानित किया गया फिर भी वे मौन रहे
अंत में उनकी पत्नी माता सती को क्रोध आने पर जब हवन कुण्ड माता सती ने आत्मदाह किया




