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Tuesday, April 7, 2020

हनुमान किसे कहते है

बुरे वक्त में जो काम आए
उसे इंसान कहते है
मुसीबत में जो भगवान बन जाये
उसे हनुमान कहते है
हनुमान वहां है जहाँ श्री राम रहते है
राम वहा रहते है
जहां सच्चे और भोले इंसान रहते है
इंसान का बुरा वक्त तो निकल जाता है
पर मदद करने वाला इंसान सदा याद आता है
मदद का दूसरा नाम हनुमान है
जिनकी शक्ति का नही लगा सकते अनुमान है
हनुमान वहां प्रगट होते है
जहा समस्त सम्भावनाये
समाप्त हो जाया करती है
एक सच्चे व्यक्ति के हृदय को लगती है चोट
भावनाएं जब छल जाया करती है
हनुमान वहां पर विद्यमान है
जहां सच्चाई के सामने
कोई क्रूर आतताई बलवान है
हर ली गई हो सीता
असहाय और लाचार श्रीराम है
हनुमान उस शक्ति का नाम है
जो जन जन के भीतर रहा करती है
हनुमान उस भक्ति का नाम है
जो सच्चे और पावन हृदयो में
कल कल और छल छल सी बहा करती है
हनुमान वह संजीवनी है
जिसे पाकर सच्चाई का साथी लक्ष्मण जीता है
हटा बुराई का तमस
पुनः प्रतिष्ठित हुई सीता है
हनुमान वह मर्यादा है
जो अपनी बल की सीमाएं जानती है
चुनोतियाँ मिलने पर
कभी सूरज की निगलती है तो कभी
सागर लांघती है
हनुमान वह अंतरदृष्टि है
जो अच्छाई और बुराई में
भली भांति भेद कर पाती है
वह दूर दृष्टि है जो सागर को लांघ कर
लंका भेद कर आती है
हनुमान वह सक्रियता है जो निरंतर चली है
सच्चाई के सूरज की वह रोशनी है
वह कभी नही ढली है 
हनुमान  वह आत्मबल है जो विपदा में ऊर्जा प्रदान करता है
भगवद हृदय विभीषण और सुग्रीव की पीड़ा हरता है 
बीमारी और महामारी में जब व्यक्ति जीता है न मरता है
तब हनुमद का सम्बल लोगो को मिलता है और स्वास्थ्य खिलता है

Sunday, July 19, 2015

पंचमुखी हनुमान

हनुमान जी के कितने ही रूप है 
बाल रूप रणवीर रूप  संजीवनी स्वरूप 
परन्तु हनुमान  जी का पंचमुखी स्वरूप अदभुद  है 
अनुपम  है ऊर्जावान और प्रेरणादायक  है
पंचमुखी हनुमान जी के दिव्य स्वरूप के दर्शन करने से जीवन में अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है
जीवन प्रेरणा से ओत प्रोत हो जाता है 
अकर्मण्यता के रोग से व्यक्ति मुक्त हो जाता है 
व्यक्ति प्रत्येक प्रकार के कार्य करने को 

तत्पर और उद्यत रहता है
पंचमुखी हनुमान जी के पांच मुख के साथ हनुमद बैठक
 हमें जीवन में प्रत्येक प्रकार की कार्य का 
दायित्व उठाने की प्रेरणा देती है 
  व्यक्ति को अपने कार्य क्षेत्र में कैसी भी हो 
भूमिका का स्वीकार कर लेनी चाहिए
 कभी किसी कार्य को छोटा या तुच्छ मानकर 
कर्तव्य से विमुख नहीं होना चाहिए
जो व्यक्ति सदैव कार्य करने हेतु तत्पर रहता है 
उसकी सफलता में कोई संदेह नहीं रहता है

Tuesday, March 10, 2015

हनुमद शक्ति

 हनुमान जी की भक्ति के वर्तमान में क्या लाभ है ?
त्रेतायुग में हनुमान जी ने जो 
भौतिक रूप में प्रगट होकर कार्य किये 
वह अभी संभव नहीं है 
परन्तु सज्जनो को सरंक्षण करना
 हनुमान जी का सर्वोच्च कार्य है 
जब व्यक्ति के पुण्यो का उदय होता है 
तो वह सज्जनो से वह घिर   जाता है
जब व्यक्ति के दुर्भाग्य का प्रारम्भ है 
 तो  न  चाहते हुए भी वह बुरे लोगो के बीच अपने आप को पाता  है 
हनुमान जी केवल यह कार्य करते है 
 कि  वे एक सज्जन को दूसरे सज्जन व्यक्ति से मिलवाते है 
इस प्रकार कई सज्जन व्यक्तियों की संगठित शक्ति 
हनुमद कृपा के रूप में प्रगट होती है 
इसलिए कहते की जहा कही सुन्दर काण्ड का गायन होता है 
 तो  हनुमान जी वहा सूक्ष्म रूप अवतरित हो जाते है 
सुन्दर  काण्ड अर्थात सुन्दर शुभ कल्याण कारी कार्य
इसका तात्पर्य यह है  कि 
सज्जनो के एकत्रित होकर  
सुन्दर शुभ कल्याण कारी कार्य करने के संकल्प करने पर
 संकल्प की पूर्ति करने हेतु 
एक अद्भुत शक्ति और ऊर्जा   सज्जनो में संचारित होने लगती है 
यही ऊर्जा हनुमद शक्ति कहलाती   है

Tuesday, April 15, 2014

हनुमान जी वायु तत्व के प्रतिनिधि क्यों है ?

 हनुमान जी को वायु तत्व का प्रतिनिधि माना जाता है 
परन्तु प्रश्न यह उठता है 
हनुमान जी वायु तत्त्व के प्रतिनिधि क्यों है ?
वायु की विशेषता होती है की वह निरंतर गतिशील रहती है 
हनुमान जी भी निरंतर सक्रीय और गतिशील रहते है 
जहा उन्हें अथवा उनके प्रभु श्रीराम को याद किया जाता है 
वहा के वातावरण में उनकी उपस्थिति का अनुभव किया जा सकता है
वायु तत्त्व की विशेषता रहती है की 
उसकी गति की दिशा को समझ कर मौसम का 
अनुमान लगाया जा सकता है 
वायु की गति की दिशा के  की गई मौसम की 
भविष्य वाणी सटीक बैठती है 
हनुमान जी भी वक्त से पहले परिस्थितियों का आंकलन कर लेते है 
उनके सारे अनुमान सटीक बैठते थे 
वायु की विशेषता होती है की
 उसका कितना भी भार हो भार का अनुभव नहीं होता 
हनुमान जी ने सदा दीन -दुखियो सज्जनो की सहायता ही की है 
कभी भी किसी पर भार नहीं बने
 उन्होंने सदा दायित्व के भार को उठाया ही है 
समाज में ऐसे बहुत से व्यक्ति देखे जा सकते है 
जो दूसरे पर भार बन कर रहते है 
यदि हमें हनुमान जी को ईष्ट बनाना है तो 
हमें दूसरो पर भार नहीं बनना  चाहिए 
वायु की विशेषता होती है की 
वह ध्वनि संचरण का  माध्यम होती है 
अंतरिक्ष जहा वायु नहीं होती 
वहा लोग आपस में संवाद नहीं कर पाते 
रामायण में हनुमान जी ने श्रीराम का सन्देश 
सीता के पास पहुंचा कर संवाद स्थापित करवाया था 
संवाद हीनता सदा हानिकारक होती है 
विवाद कितना भी उग्र रूप धारण कर ले 
संवाद के सेतु कभी टूटना नहीं चाहिए 
संवाद सुलह की एक कड़ी होते है 
पृथ्वी के आस पास मौजूद वायु तत्व
 जिसे हम ओजोन मंडल कहते है 
वह हमारी अंतरिक्ष से आने वाली सूर्य की 
हानिकारक किरणों से रक्षा करती है 
यह वायु तत्त्व की विशेषता है
 हनुमान जी भी सज्जनो का सरंक्षण करते है 
सुग्रीव उनके भ्राता बाली की अपेक्षा कितने ही कमजोर थे 
पर हनुमान जी ने सुग्रीव का ही साथ दिया था 
यदि हम हनुमान जी को अपना ईष्ट मानते है 
तो हमें भी दुर्बल और कमजोर व्यक्तियों की सहायता करनी चाहिए 
सरंक्षण  करना चाहिए 
 अंतिम रूप से वायु की विशेषता होती है 
उसमे अतुलित बल होता है 
वायु जब तूफ़ान का रूप धारण करती  है 
तो समुद्र में चक्रवात और तूफ़ान पैदा कर सकती है 
धरती पर विशाल शीला खंडो को चकना चूर कर देती है 
नदियों को रास्ता बदलने पर मजबूर कर देती है 
परन्तु वही  वायु  जब अनुशासित होती है तो 
पवन ऊर्जा कई घरो को रोशनी देती है 
संयंत्रों में तरह तरह के उत्पादों का निर्माण कर देती है 
वायु के अनुशासित वेग से नौकाएं सही दिशा में 
गति पाकर मंजिल पा लेती है 
हनुमान इसलिए पवन पुत्र कहलाते है 
क्योकि उनमे अतुलित बल है 
वे अतुलित बल से आकाश में उड़ सकते है 
अनुशासित होकर राम सेतु बना लेते है 
परन्तु जब उन्हें लगता है उनकी सज्जनता का 
हास्य बनाया जा रहा है तो वे भीषण तांडव भी मचा सकते है

Friday, April 6, 2012

हनुमद दृष्टि विकसित करे सृष्टि

पवन पुत्र हनुमान शिव के अंशावतार कहे जाते है
सर्वप्रथम हम इस विषय पर सोचे कि
जिस दशानन रावण को शिव जी ने अभयदान दिया था 
शिव जी रावण के इष्ट देवता थे 
उन्हें हनुमान जी के रूप में अवतार लेने की आवश्यकता क्यों हुई इसका मूल कारण यह था कि
  जिस व्यक्ति को एक बार अभयदान दे दिया और जो शरणागत आ गया हो वह कितना भी दुष्ट क्यों न हो 
उसका वध करना उचित नहीं होता है 
इसलिए शिव जी ने हनुमान जी के रूप में 
वानर कुल में अवतार लिया था 
हनुमान जी चाहते तो स्वयं रावण का वध कर सकते थे 
किन्तु उन्होंने श्रीराम जी का साथ दिया तथा भिन्न भिन्न प्रकार से रावण के सहयोगियों संहार किया 
स्थितिया श्रीराम के अनुकूल बनायी 
संभवत यदि हनुमान जी नहीं होते तो 
रावण का वध किया जाना श्रीराम के लिए मुश्किल था 
इसका तात्पर्य यह है कि 
 शिव जी ने हनुमान जी के रूप में अवतार लेने के बावजूद मर्यादा का पालन किया  
हनुमान जी के बारे में कहा जाता है 
 कि वे राम काज करने को आतुर रहते थे 
राम काज का तात्पर्य यदि राम जी के सहयोग को मानना 
संकीर्ण अर्थ होगा 
उन्होंने श्रीराम जी से हुई प्रथम भेट के पूर्व भी 
सुग्रीव जैसे सज्जन व्यक्ति की  रक्षा  की 
तथा तपस्यारत मुनियों को राक्षसों से सरंक्षण भी प्रदान किया 
आज भी जब कोई सज्जन व्यक्ति संकट ग्रस्त होता 
तो श्री हनुमान जी को याद करने पर वे तुरंत राम काज मान कर 
मदद करने को तत्पर हो जाते है 
हनुमान जी में एक विशेष गुण था की वे छद्म वेशी को तुरंत पहचान जाते थे
 जैसे उन्होंने विभीषण एवम कालनेमि में पहचान की 
हमारे जीवन में सदा हनुमद दृष्टि रहे यह प्रयास करना चाहिए 
 हनुमान जी का यह गुण की कभी भी उन्होंने किसी भी महत्वपूर्ण कार्य का श्रेय स्वयं नहीं लिया अद्भुत था 
जैसे राम एवम रावण के युध्द के पूर्व एवम युध्द के समय उन्होंने नल -नील से समुद्र पर सेतु निर्माण का कार्य प्रारंभ करवाना 
,अंगद को राम जी के दूत के रूप रावण के दरबार में भेजना 
,सुग्रीव को सेनापति के रूप युध्द में अग्रसर करना 
जाम्बवंत जी को मार्गदर्शन समय समय पर प्राप्त करना 
यह हनुमान जी की नेत्रत्व क्षमता को दर्शाता है 
किसी भी कार्य के श्रेय लेने वाले व्यक्तियों को 
हनुमान जी से उक्त गुण ग्रहण कर अपने व्यक्तित्व में विकास कर कार्य का श्रेय  बांटने का अभ्यास करना चाहिए