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Sunday, June 24, 2018

पुरुष कौन ?

पुरुष कौन  ? 
पुरुष वह है जो पुरुषार्थी हो 
जो पुरुषार्थ न करे भाग्य के भरोसे बैठा रहे 
वह व्यक्ति हो सकता है किन्तु पुरुष नहीं 
आध्यात्मिक पुरुषार्थ आजीविका सम्बंधित पुरुषार्थ 
पुरुषार्थ के कई प्रकार होते कई रूप होते 
किसी भी प्रकार की रचनात्मकता ज्ञानार्जन 
शोध कृषि कार्य समाज सेवा पुरुषार्थ की परिधि में आते है 
महिला कौन ? 
महिला वह है जो मही अर्थात  भूमि 
के सामान क्षमा की मूर्ति हो
 भूमि के सामान पोषण करे 
जिसका सानिध्य पाते ही तन मन आल्हादित हो 
जो निरंतर नए बीजो को अंकुरित कर 
समाज और परिवार को उर्वरकता प्रदान करे 
मिटटी के सामान ममत्व का भाव संजोये रखे 
जो स्त्री मही  अर्थात भूमि में व्याप्त गुणों की भाँती 
न हो वह स्त्री हो सकती है पर किसी भी अर्थ में 
महिला के रूप में परिभाषित नहीं की जा सकती है 

Saturday, February 20, 2016

स्मार्ट सिटी के बीच भिक्षा वृत्ति

वर्तमान में स्मार्ट सिटी योजना के तहत
 देश के प्रमुख शहरों को सजाया संवारा जा रहा है शहरों को प्रदुषण मुक्त बनाने 
और स्वच्छता पूर्ण  बनाने का प्रयास किया जा रहा है इस हेतु शहरों में हौड़ सी मची हुई है
 परन्तु इस दिशा में किसी का ध्यान नहीं जा रहा है कि शहरों भिक्षावृत्ति के कारण 
कितनी अव्यवस्था गन्दगी 
और अपराधिक् गतिविधियों पनप रही है 
बड़े शहरों में ही नहीं 
प्रमुख तीर्थ स्थलो में भी 
बदते भिखारियो की संख्या चिंताजनक है 
वृध्द .अशक्त. विकलांग  और विक्षिप्त .अर्धविक्षिप्त भिखारियो की फौज के बीच 
युवा हृष्ट पुष्ट महिला पुरुष
 भिखारियो को देख कर ऐसा लगता है 
कि शासन द्वारा इन लोगो के लिए 
कोई योजनाये बनाई ही नहीं गई है 
या शासन द्वारा बनाई गई 
योजनाये परिश्रम की प्रधानता के कारण 
ये लोग भिक्षा वृत्ति कर रहे है 
महत्वपूर्ण यह होगा कि 
इन युवा और स्वस्थ भिखारियो की पहचान कर 
इन्हें कार्य कुशल बना श्रम प्रधान रोजगार में लगा कर इन्हें आर्थिक रूप से स्वालम्बी बनाया जाए ।
इनमे जो भिखारी निकम्मे और अकर्मण्य हो 
उनसे स्थानीय निकायों द्वारा 
नगर के स्वच्छता के कार्यो में
 उपयोग लिया जा सकता है 
इसके लिए सामाजिक सांस्कृतिक 
स्वयं सेवी संगठनो का सहयोग भी लिया जा सकता है
वे भिखारी जो नदियो के पावन घाटो पर
 भिक्षा वृत्ति कर रहे है 
उनसे सप्ताह में एक बार घाटो की 
साफ़ सफाई कराई जा सकती है 
इस कार्य के लिए उन्हें शासन द्वारा निर्धारित पारिश्रमिक दिया जा सकता है 
उपरोक् कदम से भिक्षा वृत्ति की समस्या से
 बहुत हद तक मुक्ति मिल सकती है
 और स्मार्ट सिटी के मुखड़े से 
भिक्षा वृत्ति का कलंक मिटाया जा सकता है 

Saturday, February 15, 2014

शासकीय कर्मचारी और आयकर

सरकार की आय का मुख्य स्त्रोत है आयकर 
आयकर का वह भाग जो सरकारी कर्मचारियो से जुड़ा है 
महत्वपूर्ण है 
क्योकि सरकारी कर्मचारियो की आय से कर वसूली हेतु 
सरकार कोई प्रयास नहीं करना पड़ते 
सारे प्रयास आयकर दाता कर्मचारीगण को ही करना पड़ते है 
कि वह अपनी आय को किस उपाय से आयकर से बचाये 
सभी संत महंत लोगो को अपनी आय का दशांश 
दान करने का उपदेश देने से नही भूलते
पर वे भूल जाते है 
कि एक शासकीय कर्मचारी आय की एक सीमा के बाद
 अपनी आय का १/५ से लगाकर एक तिहाई तक 
आयकर के रूप मे देश और समाज को धन दान कर देता है 
इसलिये ऐसे कर्मचारियो को दाता के रूप मे 
सम्बोधित किया जाता है
 चाहे आयकर दाता के रूप मे ही क्यों न हो ?
जब व्यक्ति किसी धर्म ,समुदाय संस्था विशेष को दान करता है 
तो उस धन का उपयोग सीमित होता है 
पर जब कोई व्यक्ति आयकर के रूप धन का दान शासन करता है 
तो उसका उपयोग किसी धर्म समुदाय संस्था विशेष के लिए 
न होकर सम्पूर्ण राष्ट्र और समाज के लिए 
सम्पूर्ण प्रयोजनों के लिये होता है
वर्त्तमान मे जो आयकर हेतु जो मानक निर्धारित किये गये है 
उसमे बहुत से ऐसे कर्मचारी भी आ गये है
 जो चतुर्थ श्रेणी मे कहलाते है 
कितने गुना महंगाई बढ़ गई मुद्रा क़ा कितना ही अवमूल्यन हो 
आयकर कटौती के पुरातन प्रावधान यथावत जारी है 
समय -समय पर जो आंशिक राहत दी जाती 
वह दिखाई बहुत जाती है पर  नगण्य ही पाई जाती है

Saturday, June 1, 2013

संघर्ष में ही निखरता व्यक्तित्त्व

जीवन सभी प्रकार की अनुकूलताओ से भरा हो
 यह संभव नहीं है
जहा  गरीब आदमी के पास स्वास्थ्य होता है
 उसके पास धन नहीं होता
जहा धनवान व्यक्ति के पास सभी प्रकार की सुविधाए होती
 वह अच्छे स्वास्थ्य स्वामी हो 
 यह आवश्यक नहीं
किसी व्यक्ति को संतान सुख हो 
उसकी संताने आज्ञाकारी हो ,यह आवश्यक नहीं
पत्नी सौन्दर्य की स्वामिनी हो 
उस पत्नी में स्त्रियोचित गुण हो ,यह आवश्यक नहीं
ज्ञान के साथ विवेक हो ,यह सदा नहीं होता
कोई व्यक्ति फूटपाथ पर भूख के कारण रोता है
तो कोई व्यक्ति महल में भी चैन की नींद नहीं सोता
गरीबी के परिवार में परस्पर विश्वास का भाव बना रहता
वही परिवार सम्पन्न होने पर एक दूजे का विशवास खोता
गरीब आदमी की अपनी समस्याए है
धनी  व्यक्ति की अपनी अनकही व्यथाए है
अधिक आय से कहा अधिक सुख मिल पाया है
अल्प आय में भी कोई सही ढंग कोई जी पाया है
जो अभावो में मित्र रहे है
अभावो में जिन्होंने साथ रह कर दुःख सुख सहे है
वे समृध्दी के पलो में साथी नहीं रहे है
समृध्दी सदा व्यक्ति को लुभाती क्यों है?
कथाये प्रेम और सौन्दर्य की सभी को सुहाती क्यों है ?
प्रेम पथिक को बाद में जिंदगी रुलाती क्यों  है ?
सज्जनता सज्जनों कमजोरी क्यों कहलाई 
बुराईयों पर अच्छाईयों पर विजय कहानियों में ही क्यों हो पाई ?
इन सभी प्रश्नों के मिल पाए कहा पर हल है 
सूर्य परिश्रम के बल उगता फिर भी   क्यों वह अस्ताचल है 
प्रश्नों की भीड़ में कोई हो जबाब तो सोचो 
जबाब की तलाश करो या भाग्य की रेखाओं को खरोंचो
जबाब केवल एक है संघर्ष ही  जीवन है 
संघर्ष में ही निखरता व्यक्तित्त्व बनता नरोत्तम है