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Thursday, April 28, 2016
समय
Friday, November 13, 2015
राहुल की जिद
राहुल हर बात के लिए जिद करता था छोटी छोटी वस्तुओ की मांग पर वह अड़ जाता था जीवन मरण का प्रश्न बना लेता था आखिर उसकी जिद पूरी करने वाले उसके पिता जो थे धीरे धीरे राहुल उम्र बढ़ती गई पिता से उसकी अपेक्षाएं भी उसी अनुपात में बढ़ने लगी महंगाई के इस युग राहुल के पिता की सीमित आय राहुल की जिद पूरी करने में समर्थ नहीं थी राहुल का स्वकेंद्रित स्वभाव कभी खुद की असीमित आवश्यकताओ के आगे सोचने का अवसर प्रदान नहीं करता परन्तु निरंतर दायित्वों के भार और ढलती हुई उम्र के कारण राहुल के पिता का स्वास्थ्य गिरता जा रहा था अचानक राहुल पिता के देहांत की सूचना ने राहुल को हतप्रभ कर दिया घर में कुआरी बहन की शादी छोटे भाई की पढ़ाई का दायित्व का खर्चा कहा से उठाये राहुल अपनी आवश्यकताओ की पूर्ति ही नहीं कर पा रहा था अब राहुल की जिद पालने वाला शख्स जो नहीं रहा जिद जिसके बलबूते राहुल हर बात मनवा लेता था अब कुंठा और तृष्णा का कारण बन चुकी थी
Monday, August 3, 2015
कमला
Saturday, May 23, 2015
रतिराम का प्रायश्चित्त
सुन्दर पत्नी दो नन्हे प्यारे बच्चे सरकारी मकान
और नई नवेली मोटर सायकिल खुशहाल जीवन
रतिराम के तीन भाई और थे रतिराम खर्च करने में बहुत उदार था
परिवार का सबसे बड़ा भाई होने के नाते छोटे भाईयो को आर्थिक रूप से स्वालम्बन बनाना वह अपना दायित्व समझता था | पिता अत्यंत निर्धन गाव के सीधे साधे व्यक्ति
मंदिर से घर घर से चाय की दूकान उनकी दिनचर्या बन चुकी थी |आखिर रतिराम जैसा कमाऊ पूत जो पाया था |
धीरे धीरे रतिराम का सारा ध्यान अपनी पत्नी बच्चों से हट सारा ध्यान अपने भाईयो की और चला गया |
आज बीस साल हो गए रतिराम बहुत खुश था |अपने सभी भाइयो को आत्म निर्भर देख कर भाइयो की पत्नी और बच्चों को खुशहाल देख कर पर अगर कुछ नहीं उसके पास तो वे उसके छोटे छोटे बच्चे जो हो गए थे बड़े बिना पिता के सरंक्षण के खो चूका था रतिराम अपनी पत्नी का स्नेह और बच्चों का सानिध्य ||बची थी रतिराम के पास प्रायश्चित्त कि वह भावना कि काश वह भी अपने बच्चों की और दे पाता तो उसने भी पाये होते कमाऊ पूत
Wednesday, June 4, 2014
रिश्तो की असलियत
Monday, October 21, 2013
पुण्य-लघु कथा
Thursday, September 19, 2013
सेवा निव्रत्ती और संकट
Saturday, August 17, 2013
राजा की भूल -लघु कथा
पर राजा को अपनी गलती समझ में आई
Friday, July 26, 2013
लघु कथा -रामकिशन
Saturday, July 6, 2013
चरित्र और नियति -लघु कथा
Sunday, May 26, 2013
तीर्थ यात्रा -लघु-कथा
पुण्य सलिला में स्नान करने के पश्चात
तट पर बिखरे पत्थरो को एकत्र कर छोटा घर का प्रतिरूप बनाया
पूछने पर बताया की जीवन स्वयं का घर बने यह उनका सपना है
माँ नर्मदा उनकी मनोकामना पूरी करेगी
मैंने उनसे पूछा की आयु के इस मुकाम तक क्या उन्होंने
इतना भी संचय नहीं किया की वे घर बना पाए
जीवन भर उन्होंने क्या किया ?
उनका जबाब था की जीवन भर वे तीर्थ यात्रा करते रहे