Total Pageviews

Thursday, February 18, 2016

पुरुषार्थ क्या है ?

पुरुषार्थ क्या है ?
पुरुषार्थ  जीवन का मध्य है 
पूर्वार्ध्द है उत्तरार्ध है
 पुरुषार्थ जीवन का भावार्थ  है 
पुरुषार्थी व्यक्ति के लिए यह खुला गगन है
क्षितिज तक विस्तृत्त  धरा है
विपत्तियाँ हुई बौनी विश्व हरा भरा है
पुरुषार्थ के बल पर विश्वामित्र ने
 ब्रह्म ऋषि का पद पाया था 
स्वर्ग और धरा के अतिरिक्त 
अपना एक अलग स्वर्ग  बनाया था 
पुरुषार्थ एक क्रान्ति है जिसके बल पर चाणक्य ने महान मौर्य सामार्ज्य  
और आर्यावर्त अखंड भारत बनाया था
पुरुषार्थी व्यक्ति 
जीवन में सभी महान लक्ष्यों को पाता  है 
परिस्थितिया  कितनी भी भीषण हो 
कठिनाईयों के सुनामी चक्रवातों से टकराता है 
पुरुषार्थ पुरुष होने का अर्थ है 
पुरुष होने का तात्पर्य 
पुरुषार्थ पाकर होना समर्थ है 
पुरुषार्थी परशुराम थे
 जिन्होंने पुरुषार्थी परशु पाकर 
पितृ ऋण  चुकाया था 
मार्कण्डेय ने अल्पायु से 
अमरता का वरदान पाया था
पुरुषार्थ ज्ञान अर्जन की अभिलाषा है 
मौन साधना है तपस्या की भाषा है
सीधे शब्दों में कहे तो आक्रामक नहीं 
सकारात्मक और रचनात्मक जीवन जीने की आशा है
 पुरुषार्थी  साधनो का नहीं 
प्रेरणा का मोहताज होता है
प्रेरणा के अभाव में व्यक्ति अपनी ऊर्जा खोता है 
इसलिए पुरुषार्थी बन कर 
भौतिक और आध्यात्मिक उपलब्धिया पाओ 
मानवीय संवेदना से हो परिपूर्ण हो 
जीवन को  सृजनात्मक विधाओ से सजाओ 





 


Wednesday, February 17, 2016

नर्मदा का हर कंकर शंकर क्यों?

नर्मदा का हर कंकर शंकर होता है यह कहना जितना आसान है इसका समझना इतना ही मुश्किल है मूलतः
शिव जी का ज्योतिस्वरूप जो पाषाण के शिवलिंग होते है नर्मदा नदी जब उसके उत्पत्ति स्थल अमरकंटक से निकलती तो वह अपने प्रवाह से अपने भीतर और तटो पर स्थित चट्टानों को चीरती हुई उन्हें तोड़ती हुई आगे बढती है जल की निर्मलता कोमलता का स्पर्श पाकर पाषाण की कठोरता द्रवित होने लगती है और वे सहज ही नैसर्गिक सौंदर्य को पा शिव स्वरूप को धारण करने लग जाते है इसका आशय यह है कि व्यक्ति कितना भी निष्ठुर और पाषाण ह्रदय हो निरन्तर करुणा और निर्मल निश्छल कोमल स्नेह को सतत प्राप्त करता है तो वह उसका बाहरी स्वरूप निखर जाता है उसके भीतर की पवित्रता को प्रतिबिंबित करता है नर्मदा के कंकर को शंकर बनते हुए आपने देखा है परन्तु हम आपको ऐसे शिवलिंग से परिचित कराना चाहते जो निरन्तर नर्मदा में जलमग्न रहते है वीडियो में  दर्शित शिवलिंग का दर्शन कर नर्मदा में  जलमग्न नर्मदेश्वर शिव शंकर के में निहित अद्भुत ऊर्जा और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त कर सकते है

Tuesday, February 16, 2016

UNIVERSE: मौन की महत्ता

UNIVERSE: मौन की महत्ता

मौन की महत्ता

मौन रहने के कई फायदे है 
मौन वह शैली है 
जिसके कई कायदे है 
मौन वह आवरण है 
जो मूर्खता को ढंक लेता  है 
मर्यादा दूसरे की और अपनी रख लेता है 
मौन से व्यक्ति शान्ति प्रिय कहलाता है 
दूसरा कितना भी अशांत हो 
खुद शान्ति को पाता  है 

मौन एक तपस्या है तप  का प्रतीक है 
मौन संकेतो की व्याख्या 
नहीं की जा सकती ठीक ठीक है 
मौन एक अनुशासन है 
मौन की अपनी व्यवस्थाये है 
छुप  जाती है सभी कमजोरिया 
परिलक्षित नहीं हो पाती शिथिलताये है 
मौन रहने वाला कभी नहीं पछताता है 
क्योकि जो  वह नहीं बोला 
वह होने पर उसे बोला हुआ माना जाता है 
और कुछ नहीं होने पर न बोलना काम आता है 

मौन एक कला है 
संवेदना के स्तर पर 
व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरा है ढला है 
मौनी व्यक्ति को 
मौन रहने से मिलती  खुशिया 
दुगुनी चौगुनी सौगुनी है 
मौन रहने वाले व्यक्ति के साथ 
कभी नहीं होती अनहोनी है 
क्योकि जो बात  होनी है वह होनी है 
नहीं होनी है वह कभी नहीं होनी है 
इसलिए झूठ और कटु बोलने से 
बचना हो तो मौन रहो 
तटस्थ और निष्पक्ष दिखना है तो मौन रहो 

मौन वह शस्त्र है 
जो मुस्कान को जन्म देता है 
व्यक्ति जब मुस्कराता है 
तो भाव कई अर्थ लेता है 
कितना भी कर ले पाप 
वह अपने माथे पर नहीं लेता है 
वर्ष में मात्र एक बार मौन अमावस्या आती है 
जो मौन रहने की महिमा सिखला कर 
चुपचाप चली जाती है
इसलिए बंधुओ मौन की ताकत को 
पहचानो समझो और जानो 
कुछ अनर्गल बोलने से पहले 
मौन रहने में अपना भला मानो  

Sunday, February 14, 2016

अच्छाई का मूल्य

राकेश अपने माता पिता का इकलौता बेटा था
माता पिता का आज्ञापालक पर पढ़ने में कमजोर
संस्कारित पर एकांत प्रिय अपने काम से काम करने वाला खेलो चित्र कला में थोड़ी थोड़ी रूचि पर पूर्णता किसी में भी नहीं छोटी छोटी बात का बुरा  लगना उसका स्वभाव था चरित्र का दृढ स्वाभिमानी अभावो में रहने का अभ्यस्त संतोषी परन्तु जीवन में प्राथमिकताएं अभी उसने तय नहीं की थी ठीक उसके विपरीत विपिन जो उसका सहपाठी था उद्दंड शरारती अपनी मनमानी करने वाला परन्तु अच्छा वक्ता धुन का पक्का जो सोच लिया उस कार्य को पूरा कर लेना उसका स्वभाव था चरित्र ऐसा कि वातावरण में सीघ्र समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता के आधार पर महत्वपूर्ण कार्य कर लेता था
विपिन की इसी आदत के कारण उसके पास मित्रो की लंबी फौज थी प्रश्न यह है कि क्या राकेश जैसे अच्छे लडके की कोई कीमत नहीं है क्या अच्छाई व्यक्ति के विकास के लिए उपयोगी नहीं है ऐसा नही है राकेश की अच्छाई का मूल्य हो सकता है परन्तु वह समय के अनुरूप वह स्वयं को ढालने सक्षम हो कार्य में पूर्णता हासिल करना उसकी प्रव्रत्ति हो  जीवन में उसने प्राथमिकताये तय की हो तभी अच्छाई और अच्छे व्यक्ति का मूल्य रह पायेगा

Saturday, February 13, 2016

Srijan: मात नर्मदे चपल तरंगे

Srijan: मात नर्मदे चपल तरंगे: पुण्य सलिला रेवा माता , तेरे सदगुण मानव गाता जप तप तेरे तट पर होते , जप तप से है मन हरषाता   मात नर्मदे चपल तरंगे , दर्शन प...

तू दे कला ,माँ वत्सला और लेखनी को धार दे

माँ शारदे तू तार दे
 जीवन मेरा संवार दे 
हुआ विषम कठिन जीवन 
 नवीन सृजन विचार दे

बढे चरण बढे चरण 
सदा मेरे बढे चरण 
है कामना  यही मेरी
 विमल मति तेरी शरण
तू दे कला ,माँ वत्सला 
और लेखनी को धार दे 

सरल तरल कमल नयन
 हो हंस सा धवल हो मन 
सृजन फसल का अंकुरण
 रहे गति ,नहीं क्षरण 
हो शत्रुता कही नहीं 
माँ मित्र दे और प्यार दे