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Saturday, November 14, 2020

दीपो की बारात

अन्धियारे में  पाप रहा , होता उजला पुण्य
दीपक से तम घोर भगा, होता तम है शून्य

सृजन में उजियार रहा, प्रलय में तम घोर
सृष्टि कितनी शान्त रही , मत करना तू शोर

जगमग जगमग आज चली ,दीपो की बारात
दीपो से है रात खिली , कुदरत की सौगात

कोहरे से है धूप लदी, बहके है जज्बात
दीपो से है सेज सजी, अंधियारे में बात

Thursday, November 12, 2020

वैसा ही सम्भव

सपनो में तव सोच रहा , सपनो रहे कचोट
तू सपनो में लिप्त रहा, हुई चोट पर चोट

जैसा जिसका भाव , ठीक वैसा ही भव
वैसे ही सब लोग मिले , वैसा ही सम्भव

विद्या से विनम्र हुआ , प्रज्ञा से  है धन्य
भीतर से है भींग गया ,प्राणों से चैतन्य

भावो में ही बसा रहा, होता वह भगवान
हुआ भाव से शुन्य यहाँ, वो कैसा इन्सान


Wednesday, November 4, 2020

रिश्तो की है नाव

रिश्ते पावन प्रीत भरे, रिश्ते है गुलकंद
रिश्ते दुख और दर्द हरे, रिश्ते सुरभित गंध

कुछ रिश्तो से नेह मिला , कुछ रिश्तो से दंश
रिश्तो में कौन्तेय मिले, कुछ रिश्तो में कंस

रिश्तो में सौंदर्य रहा ,रिश्तो की है छाँव
डग मग करती नही डूबी , रिश्तो की है नाव

जितने भी थे रूठ गये , जो थे रिश्तेदार
रिश्तो की पड़ताल करे, रिश्तो के हकदार

रिश्तो से है प्यार मिला , पाया लाड़ दुलार 
ऐसे रिश्ते कहा गये, उनको रहे पुकार

Saturday, October 31, 2020

संस्कृति और संस्कृत

लोग कहते है 
संस्कृत और संस्कृति मर रही है 
संस्कृत और संस्कृति के स्थान पर 
पाश्चात्य भाषा और संस्करहीनता
विद्रूप रूप धर रही है 
परन्तु संस्कृत और संस्कृति कभी मरा
नही करती है 
संस्कृत जीवित है
मंत्रो के उच्चारण में ।
श्लोको में हिंदी की व्याकरण में 
संस्कृत जीवित है 
हिंदी के संधि विच्छेद में 
अलंकार में बिम्ब में प्रतिबिम्ब में 
संस्कृत से जुड़कर 
हिंदी समृध्द हो जाती है 
विज्ञान में जब हिंदी में 
तकनीकी शब्दावलिया नही मिली पाती है 
तो संस्कृत याद आती है
संस्कति वहा याद आती है 
जब संयुक्त परिवार की परम्पराए समाप्त 
हो जाती है और विचारों और संस्कारों में
 लघुता आ जाती है 
संस्कृति वहा याद आती है 
जब विदेशो में बसे भारतीय की आँख
अपनी मिट्टी की याद से भींगो जाती है
इसलिये संस्कृत और संस्कृति 
कभी मरा नही करते है 
वे सदैव अपनो परम्पराओ रूढ़ियों 
पुरातन और सनातन ज्ञान की धाराओं में 
बहा करते है

Monday, October 26, 2020

तेरे दर भगवान

सच्चे अच्छे कार्य करे, सेवा और उपकार
सेवा तुझको धन्य करे,उपकृत से दातार

सेवा तो गुमनाम रहे, दाता रहे अनाम
याचक बनकर माँग रहा, तेरे दर भगवान

मिल जुल करके काम करो, रखो कार्य मे धार
कार्य यहाँ अनिवार्य रहा, परखा फिर व्यवहार

मिलता जुलता रूप रहा, मिलते जुलते गुण
उल्टे सीधे कार्य करे ,फिर भी कार्य निपुण

मिली जुली कोई बात मिली , मिलते नये पड़ाव
मिलने का जब दौर चला, मिले हृदय में घाव



Sunday, October 25, 2020

Srijan: देहरी में हो दीप

Srijan: देहरी में हो दीप: घर मे खुशिया बसी रहे, देहरी में हो दीप दोहरे होते चाल चलन , उन सबको तू लीप मौलिकता तो मिली नही , मिले मिलावट लाल मिले जुले ही रूप मिले , मौल...

Friday, July 10, 2020

वैधानिक गल्प - उपन्यास समीक्षा

राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उपन्यास वैधानिक गल्प लेखक चंदन पांडेय द्वारा अभिलिखित है ।वैधानिक उपन्यास अर्जुन नामक ऐसे व्यक्ति से आरम्भ होती है जो लेखक और कथाकार के साथ प्रकाशन समूह का संपादक भी है ।  अर्जुन जिसकी पत्नी अर्चना है को तब झटका लगता है जबकि एक दिनअर्जुन  उसकी पूर्व प्रेमिका अनसूया का  नोमा नामक कस्बे से फोन आता है । अनसूया अर्जुन को बताती है कि  उसका पति रफीक कही गायब हो गया है ।।      
                    रफीक रंग कर्मी के साथ कॉलेज में संविदा प्राध्यापक भी रहा है। अर्जुन अनसूया की मदद के लिए पहुँचता है ।  अर्जुन अनसूया को थाने में पुलिस द्वारा अपमान जनक तरीके से पूछताछ करते हुये पाता है । थाने के आतंक पूर्ण वातावरण को महसूस करता है । अनसूया से गर्भ से है को अर्जुन थाने से उसके घर ले जाने के बाद कुछ दिनों के लिए अर्जुन नोमा ही रुक जाता है । प्रकाशन समूह के मालिक की मदद से अर्जुन को थाने का प्रभारी शलभ का सहयोग प्राप्त होता है ।परंतु स्थानीय राजनीति के चलते रफीक का नाम लव जेहाद में जुड़ जाता है क्योंकि रफीक के गायब होने के साथ उसकी छात्रा जानकी के गायब होने की जानकारी भी उसे प्राप्त होती है 
          रफीक की तलाश किये जाने के सिलसिले में अर्जुन को रफीक की डायरी प्राप्त होती है जिसके गीले और फटे हुये  पन्नो पर लिखी इबारत को पढ़ने का प्रयास करता है ।जिसके माध्यम से अर्जुन गायब होने के पूर्व रफीक की क्या मानसिकता थी । इसे समझने चाहता है ।इसी दौरान अर्जुन को निलम्बित पुलिस उपनिरीक्षक अमन दीप मिलता है जिसके ऊपर आर्थिक गबन का आरोप है ।परंतु गहराई से जांचने पर ज्ञात होता है ।अमन दीप को निलंबित किये जाने की वजह कुछ और है। जिसमे अमन दीप ने एक व्यक्ति को प्रायोजित भीड़ द्वारा की गई हिंसा से बचाये जाने के कारण स्थानीय राजनेता की नाराजगी है  उपन्यास के अंत तक गायब हुए रफीक और जानकी का पता नही चलता। 
          उपन्यास के माध्यम से लेखक ने यह तथ्य कहने का प्रयास किया है कि प्रत्येक मामले को लव जेहाद का रंग देने की आवश्यकता नही है ।कितने संविदा अध्यापकों और प्राध्यापको को लंबे समय से नियमित न किया जाकर उनका शोषण किया जा रहा है । उपन्यास के माध्यम से लेखक ने पुलिस की कार्य प्रणाली और पुलिस स्थानीय राजनेताओ के साथ साठ गांठ को रेखांकित किया है । लेखक ने यह प्रश्न भी उठाया है ।पुलिस में संवेदनशीलता का अभाव है वह एक प्रसूता के साथ पेशेवर अपराधी की तरह व्यवहार करती है ।