कस्तूरी और दुर्गा दोनों पति पत्नी न्यायालय बाहर खड़े अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे |उनके रघु द्वारा साथ हुई मारपीट में जो बयान देने के लिए आये थे |थोड़ी देर में उन्हें पुकारा गया भीतर न्यायालय कक्ष में पहुचे रघु के वकील साब जो तारीख बढ़ाने के लिए खड़े थे |इतने देर में ही कस्तूरी और दुर्गा से रहा नहीं गया और बोल पड़े की साहब हम राजीनामा करना चाहते है |जज साहब और वकील साहब दोनों स्तब्ध हो उन्हें देख रहे थे| जज साहब ने पूछा आप राजीनामा क्यों करना चाहते हो| दोनों पति पत्नी बोल पड़े की दिन भर मजदूरी करने के बाद हमें शाम को रोटी मिलती है |हमें इतना वक़्त कहा है कि लड़ाई झगड़ा में अपना समय खराब करे |यह सुनकर अभियुक्त रघु की आँखों में पश्चात्ताप के आंसू आ गए सोच रहा था ,कि एक तरफ तो जिसने अकारण कस्तूरी और दुर्गा के साथ मारपीट की और दूसरी तरफ वे कस्तूरी दुर्गा के पास आजीविका के साधन जुटाने की व्यस्तता में लड़ाई झगड़े का भी समय नहीं है
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Thursday, April 28, 2016
Sunday, April 17, 2016
महाकाली का श्याम वर्ण क्यों?
महाकाली का वर्ण काला क्यों होता है ?
महाकाली के काले वर्ण का रहस्य क्या है?
महाकाली का उद्भव इसलिए हुआ था कि
अपराजेय दैत्य को परास्त करना देवताओ के
लिए असम्भव हो गया था दैत्य को निशाचर
भी कहा जाता है अर्थात उनकी शक्तिया रात्रि
अधिक प्रभावी हो जाती थी रात के अँधेरे का
लाभ उठाकर अमानवीय अत्याचार करते थे
धोखे देवताओ पर प्रहार कर उन्हें पीड़ित करते थे
इसलिए दैत्यों का परास्त करने उनका समूल नाश
करने के लिए देवी ने श्याम वर्ण धारण किया
और निशाचरों को गहन अंधेरो में छुपने का मौका
नहीं दिया उनका चुन चुन कर वध किया
महाकाली के काले वर्ण का रहस्य क्या है?
महाकाली का उद्भव इसलिए हुआ था कि
अपराजेय दैत्य को परास्त करना देवताओ के
लिए असम्भव हो गया था दैत्य को निशाचर
भी कहा जाता है अर्थात उनकी शक्तिया रात्रि
अधिक प्रभावी हो जाती थी रात के अँधेरे का
लाभ उठाकर अमानवीय अत्याचार करते थे
धोखे देवताओ पर प्रहार कर उन्हें पीड़ित करते थे
इसलिए दैत्यों का परास्त करने उनका समूल नाश
करने के लिए देवी ने श्याम वर्ण धारण किया
और निशाचरों को गहन अंधेरो में छुपने का मौका
नहीं दिया उनका चुन चुन कर वध किया
Thursday, April 14, 2016
नवरात्रि
नवरात्रि देवी का पूजन है
जप है तप है आराधना है
नवरात्रि नवल सृजन है
नवीन संकल्प है कर्म साधना है
नवरात्रि क्रिया शक्ति है महामंत्र है
ओंकार मात्रा है
आंतरिक शक्तियो का जागरण है
आध्यात्मिक यात्रा है
नवरात्रि गहन अन्धकार में
उजाले की आस है
भौतिक जगत के मध्य
नवधा भक्ति है ज्ञान की प्यास है
नवरात्रि भावनाओ का एक क्रम है
संवेदनशीलता है
नवीन अनुभूतिया पाने का उपक्रम है
नवरात्रि मातृ शक्ति का वरदान है
देवी का गुणगान है देवीयता धारण कर ही
व्यक्ति बना महान है
जप है तप है आराधना है
नवरात्रि नवल सृजन है
नवीन संकल्प है कर्म साधना है
नवरात्रि क्रिया शक्ति है महामंत्र है
ओंकार मात्रा है
आंतरिक शक्तियो का जागरण है
आध्यात्मिक यात्रा है
नवरात्रि गहन अन्धकार में
उजाले की आस है
भौतिक जगत के मध्य
नवधा भक्ति है ज्ञान की प्यास है
नवरात्रि भावनाओ का एक क्रम है
संवेदनशीलता है
नवीन अनुभूतिया पाने का उपक्रम है
नवरात्रि मातृ शक्ति का वरदान है
देवी का गुणगान है देवीयता धारण कर ही
व्यक्ति बना महान है
Wednesday, April 6, 2016
आया अब सिंहस्थ
महाकाल उज्जैनी में आया अब सिंहस्थ
हरसिध्दि भी हरी भरी हरे भरे हो स्वस्थ
महाकाल उज्जैनी में आया अब सिंहस्थ
मंगल दंगल हुआ करे मिटे शंख से कष्ट
महाकाल उज्जैनी में आया अब सिंहस्थ
संतो का अब संग रहे कभी नहीं हो भ्रष्ट
महाकाल उज्जैनी में आया अब सिंहस्थ
सिंह के जैसा भाव रहे गज सा हो मदमस्त
महाकाल उज्जैनी में आया अब सिंहस्थ
क्षिप्रा रेवा मिल गई मिले संत से गृहस्थ
महाकाल उज्जैनी में आया अब सिंहस्थ
संता बंता ढूँढ रहे सिध्द मिला न हस्त
महाकाल उज्जैनी में आया अब सिंहस्थ
भीड़ में भक्ति ग़ुम गई कटी जेब से त्रस्त
महाकाल उज्जैनी में आया अब सिंहस्थ
अब तक शाही भोज किया अब शाही स्नान करो
महाकाल उज्जैनी में आया अब सिहस्थ
Wednesday, March 30, 2016
अंत
अंत में संत है महंत है पूर्ण विराम है
अंत में मृत्यु का सत्य है श्रींराम है
अंत में कथा का श्रवण वैकुण्ठधाम है
अंत में क्षीणता दुर्बलता बुढ़ापा है
अनुभव की गहराई है नभ् नापा है
अंत में वैराग है संन्यास है शोक है
शाश्वत और सनातन है श्लोक है
अंत में लक्ष्य है शिखर है सागर गहरा है
अनंत ब्रह्माण्ड के भीतर तम ठहरा है
अंत में कृष्ण गीता है रामायण है
कर्तव्य से विमुख क्यों ? समरांगण है
अंत में लय है प्रलय है ताण्डव है
नर में नारायण सत्य में पांडव है
अंत में नाद है निनाद है नृत्य उत्तम है
शिव का डमरू बजता डम डम है
इसलिए अंत से आरम्भ है
आरम्भ से अंत है
सृष्टि का बीज है बीज में बसंत है
अंत में मृत्यु का सत्य है श्रींराम है
अंत में कथा का श्रवण वैकुण्ठधाम है
अंत में क्षीणता दुर्बलता बुढ़ापा है
अनुभव की गहराई है नभ् नापा है
अंत में वैराग है संन्यास है शोक है
शाश्वत और सनातन है श्लोक है
अंत में लक्ष्य है शिखर है सागर गहरा है
अनंत ब्रह्माण्ड के भीतर तम ठहरा है
अंत में कृष्ण गीता है रामायण है
कर्तव्य से विमुख क्यों ? समरांगण है
अंत में लय है प्रलय है ताण्डव है
नर में नारायण सत्य में पांडव है
अंत में नाद है निनाद है नृत्य उत्तम है
शिव का डमरू बजता डम डम है
इसलिए अंत से आरम्भ है
आरम्भ से अंत है
सृष्टि का बीज है बीज में बसंत है
Tuesday, March 29, 2016
आरम्भ और ऊँ
आरम्भ में ॐ है नम: शिवाय है
आरम्भ ही आदि अनादि भीमकाय है
आरम्भ में गंध स्पर्श झंकार है
भीगी हुई अनुभूतिया है निर्विकार है
आरम्भ में कठिनाईया है
आरम्भ ही आदि अनादि भीमकाय है
आरम्भ में गंध स्पर्श झंकार है
भीगी हुई अनुभूतिया है निर्विकार है
आरम्भ में कठिनाईया है
विघ्न है बाधा है
आरम्भ हो गया तो कार्य सफल हो गया आधा है
आरम्भिक अवस्था में
हर व्यक्ति सकुचाता है घबराता है
भय और संकोच के कारण आगे नहीं बढ़ पाता है
आरम्भ में उत्साह है रंग है तरंग है
होती विषम समस्याएं पर जीती जाती जंग है
आरम्भ में अर्पण तर्पण है समर्पण है
आरम्भिक प्रयासों से ही दिख जाता
आरम्भ हो गया तो कार्य सफल हो गया आधा है
आरम्भिक अवस्था में
हर व्यक्ति सकुचाता है घबराता है
भय और संकोच के कारण आगे नहीं बढ़ पाता है
आरम्भ में उत्साह है रंग है तरंग है
होती विषम समस्याएं पर जीती जाती जंग है
आरम्भ में अर्पण तर्पण है समर्पण है
आरम्भिक प्रयासों से ही दिख जाता
भावी का दर्पण है
इसलिए आरम्भ होना चाहिए
इसलिए आरम्भ होना चाहिए
उत्तम और भव्य है
उत्तम और सार्थक प्रयासों से
उत्तम और सार्थक प्रयासों से
मिल जाता गंतव्य है
आरम्भ में साधना है परिश्रम है
आरम्भ में साधना है परिश्रम है
तो जीवन योग है
तृप्त हो जाती सभी कामनाये
तृप्त हो जाती सभी कामनाये
मिल जाता आरोग्य है
Sunday, March 27, 2016
स्वास्थ्य लक्ष्मी और श्रीसूक्त
लोग माँ लक्ष्मी को मात्र धन प्रदान करने वाली देवी के रूप के में ही जानते है ऋग्वेद के श्रीसूक्त को धन ऐश्वर्य प्राप्त करने का माध्यम ही समझते है किसी का भी ध्यान अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य पर नहीं जाता जबकि स्वास्थ्य को धन से बड़ा धन माना जाता है आज हम श्रीसूक्त के उस मन्त्र की और आपका ध्यान आकृष्ट करायेगे जो लक्ष्मी जी से अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है श्री सूक्त मन्त्र जो इस प्रकार है
" मनस: कामनाकूति वाच: सत्यमशीमहि
पशूनां रूप मन्नस्य मयि श्री:श्रयतां यश :
अर्थात हे लक्ष्मी मैं आपके प्रभाव में मानसिक इच्छा एवं सकल्प वाणी की सत्यता गौ आदि पशुओं के रूप {दुग्ध दध्यादि एवं यव बीहयादी }एवं अन्नो के रूप {अर्थात भक्ष्य भोज्य चोष्य लेह्य चतुर्विध भोज्य पदार्थ }इन सभी पदार्थो को प्राप्त करू ,सम्पत्ति और यश मुझमे आश्रय ले अर्थात मैं लक्ष्मीवान और कीर्तिवान बनू ।
उपरोक्त मन्त्र में यह कामना की गई है की हे लक्ष्मी जी मुझे ऐसा स्वास्थ्य दीजिये की में सभी प्रकार के भोज्य पदार्थ ग्रहण कर सकु अर्थात चूसने चबाने खाने वाले वाले रस द्रव्य ठोस पदार्थो को दांतो से चबा सकु जिव्हा से रस लेते हुए उन्हें पचा सकू ।अप्रत्यक्ष रूप से उक्त मन्त्र से अच्छे स्वास्थ्य की कामना की गई है जिस व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा होगा वह अच्छी पाचन तंत्र का होगा ही जिस व्यक्ति के हारमोन एंज़ाइम सक्रीय होंगे वह सभी प्रकार का आहार ग्रहण कर पायेगा ।लक्ष्मी जी इस स्वरूप को स्वास्थ्य लक्ष्मी संबोधित किया जाता है जिस व्यक्ति के स्वयं तथा परिवार का स्वास्थ्य अच्छा होता है वहा बीमारिया नहीं रहती ।बीमारिया दरिद्रता का कारण होती है ।बीमारियो से मुक्त व्यक्ति और परिवार होने से धन का अपव्यय नहीं होता है
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