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Wednesday, June 29, 2016

अभ्यास

स्वाध्याय से ज्ञान की प्राप्ति होती है
परन्तु अभ्यास से ज्ञान के उपयोग का कौशल्य प्राप्त होता है
ज्ञान जब तक व्यवहारिक उपयोगिता प्राप्त नहीं कर पाता
वह विज्ञान का रूप धारण नहीं करता है
इसलिए विज्ञान में प्रयोग होते है
प्रयोग से अभ्यास किया जाता है
निरंतर अभ्यास से विषय में विशेषञता दक्षता प्राप्त होती है
अभ्यास ही गुरु है अभ्यास ही अनुभव है 
अभ्यास से प्रावीण्य है अभ्यास ही एकलव्य है
गुरु केवल मार्ग दर्शन दे सकता है 
परन्तु ध्येय की प्राप्ति अभ्यास से ही संभव है 

Wednesday, June 22, 2016

स्वाध्याय

स्वाध्याय व्यक्ति को निरंतर प्रबुध्द बनाता है 
स्वाध्याय भीतर के अन्धकार को दूर कर 
ज्ञान की रोशनी लाता है 
स्वाध्याय अहम का भाव दूर करता है 
विद्वता  का मिथ्याभिमान चूर चूर करता है 
स्वाध्याय जिज्ञासाएं शांत करता है 
अशांत और अतृप्त कामनाओं से मुक्ति प्रदान करता है 
स्वाध्याय योग मार्ग का वह सूत्र है 
जो आत्मा को परमात्मा से मिलन का एक कारण है 
स्वयं का आत्मनिरीक्षण है
 भ्रांतियों का करता निवारण है 
स्वाध्याय में वह सुख है 
जो हर किसी को नहीं मिल पाता  है 
स्वाध्याय का अनुरागी व्यक्ति 
अध्ययन से ज्ञान की शुध्दि 
और अध्यापन से शिक्षा का उजाला फैलाता है 
स्वाध्याय में स्वयं की चेतना है 
बाह्य और आंतरिक जागरण है 
जीवन में भौतिकता संजो लेना का और आध्यात्मिकता पाने का व्याकरण है 
इसलिए जीवन में मित्र स्वाध्यायी बनो 
ज्ञान के दीप  निरन्तर जलाते हुए 
नित नए सपनो को बुनो

Thursday, June 16, 2016

कोटा, राजस्थान



कोटा राजस्थान का एक प्रमुख औद्योगिक एवं शैक्षणिक शहर है। यह चम्बल नदी के तट पर बसा हुआ है। राजधानी जयपुर से लगभग २४० किलोमीटर दूर सडक एवं रेलमार्ग से। जयपुर-जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग १२ पर स्थित। दक्षिण राजस्थान में चंबल नदी के पूर्वी किनारे पर स्थित कोटा उन शहरों में है जहां औद्योगीकरण बड़े पैमाने पर हुआ है। कोटा अनेक किलों, महलों, संग्रहालयों, मंदिरों और बगीचों के लिए लोकप्रिय है। यह शहर नवीनता और प्राचीनता का अनूठा मिश्रण है। जहां एक तरफ शहर के स्मारक प्राचीनता का बोध कराते हैं वहीं चंबल नदी पर बना हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्लान्ट और न्यूक्लियर पावर प्लान्ट आधुनिकता का एहसास कराता है कोटा प्राकृतिक सौंदर्य से भरा पूरा है जिसकी सुंदरता का अनुभव आप इस वीडियो को देखकर करेंगे ।

Sunday, May 8, 2016

अक्षय

अक्षय तृतीया हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण दिवस है इस दिन बिन मुहूर्त के विवाह किये जा सकते है
बिना मुहूर्त के वाहन संपत्ति क्रय की जा सकती है
अक्षय अर्थात जिसका क्षय न हो व्यक्ति जीवन बहुत कुछ पाता है कमाता बसाता है परन्तु सब कुछ व्यय या क्षय हो जाता है बचता कुछ भी नहीं है अक्षय तृतीया उस प्रव्रत्ति का प्रतीक है जिसमे श्रम है संचय है सदाचार है शुचिता है समृध्दि है सौंदर्य है सृजन है जहा संस्कार नहीं सदाचार नहीं वहा  श्री सम्पदा अक्षय नहीं क्षरण होता रहता है अक्षय हमें यह बताती है कि  विशुध्द साधनों द्वारा अर्जित संचय ही अक्षय रहता है 

Thursday, April 28, 2016

समय

कस्तूरी और दुर्गा दोनों पति पत्नी  न्यायालय बाहर खड़े अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे |उनके रघु द्वारा साथ हुई मारपीट में जो बयान देने के लिए आये थे |थोड़ी देर में उन्हें पुकारा गया भीतर न्यायालय कक्ष में पहुचे रघु के वकील साब जो तारीख बढ़ाने के लिए खड़े थे |इतने देर में ही कस्तूरी और दुर्गा से रहा नहीं गया और बोल पड़े की साहब हम राजीनामा करना चाहते है |जज साहब और वकील साहब दोनों स्तब्ध हो उन्हें देख रहे थे| जज साहब ने पूछा आप राजीनामा क्यों करना चाहते हो| दोनों पति पत्नी बोल पड़े की दिन भर मजदूरी करने के बाद हमें शाम को रोटी मिलती है |हमें इतना वक़्त कहा है कि लड़ाई झगड़ा में अपना समय खराब करे |यह सुनकर अभियुक्त रघु की आँखों में पश्चात्ताप के आंसू आ गए सोच रहा था ,कि एक तरफ तो जिसने अकारण कस्तूरी और दुर्गा के साथ मारपीट की और दूसरी तरफ वे कस्तूरी दुर्गा के पास आजीविका के साधन जुटाने की व्यस्तता में लड़ाई झगड़े का भी समय नहीं है

Sunday, April 17, 2016

महाकाली का श्याम वर्ण क्यों?

महाकाली का वर्ण काला क्यों होता है ?
महाकाली के काले वर्ण का रहस्य क्या है?
महाकाली का उद्भव इसलिए हुआ था कि
अपराजेय दैत्य को परास्त करना देवताओ के
लिए असम्भव हो गया था दैत्य को निशाचर
भी कहा जाता है अर्थात उनकी शक्तिया रात्रि
अधिक प्रभावी हो जाती थी रात के अँधेरे का
लाभ उठाकर अमानवीय अत्याचार करते थे
धोखे देवताओ पर प्रहार कर उन्हें पीड़ित करते थे
इसलिए दैत्यों का परास्त करने उनका समूल नाश
करने के लिए देवी ने श्याम वर्ण धारण किया
और निशाचरों को गहन अंधेरो में छुपने का मौका
नहीं दिया उनका चुन चुन कर वध किया

Thursday, April 14, 2016

नवरात्रि

नवरात्रि देवी का पूजन है
जप है तप है आराधना है
नवरात्रि नवल सृजन है
नवीन संकल्प है कर्म साधना है
नवरात्रि क्रिया शक्ति है महामंत्र है
ओंकार मात्रा है
आंतरिक शक्तियो का जागरण है
आध्यात्मिक यात्रा है
नवरात्रि गहन अन्धकार में
उजाले की आस है
भौतिक जगत के मध्य
नवधा भक्ति है ज्ञान की प्यास है
नवरात्रि भावनाओ का एक क्रम है
संवेदनशीलता है
नवीन अनुभूतिया पाने का उपक्रम है
नवरात्रि मातृ शक्ति का वरदान है
देवी का गुणगान है देवीयता धारण कर ही
व्यक्ति बना महान है