Total Pageviews

Thursday, February 11, 2016

KOTA . (HADOTI) .RAJASTHAN . BHARAT


भगवत सत्ता का जीवन दर्शन

आस्तिक भाव धारण करने वाला व्यक्ति
 व्यवहारिक जगत में
 भगवद् सत्ता का अनुभव करता है 
          सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण व्यक्तित्व 
जीवन के हर क्षेत्र में ईश्वरीय शक्तियो की 
उपस्थिति को पाता है  
जो व्यक्ति इस प्रकार की अनुभूतियों से
 परिपूर्ण होता है 
उसे साधना उपासना के लिए
 विशेष प्रयत्न नहीं करना पड़ता है 
उसे स्वतः की ईष्ट का
 आशीष प्राप्त हो जाता है
 इस सिद्धांत का आधार यह है कि
 ईश्वर निराकार स्वरूप में 
प्रत्येक प्राणी और पदार्थ में विद्यमान है
  भौतिक जगत की समस्त रचनाये 
 उसी  की रची हुई है 
समय समय पर विशेष परिस्थितियों में ही
 वह केंद्रीकृत होकर साकार रूप धारण करता है 
तब उसके साकार स्वरूप को
 लोग अवतार के रूप में जानते है

Wednesday, February 10, 2016

Ancient Dhrmrajeshvar Tempal Madhya Pradesh Bharat






त्याग और निर्माण

जीवन का यह कटु सत्य है कि 
किसी भी निर्माण के पीछे 
किसी का बलिदान होता है 
गुरु अपने शिष्य को पूर्णता
 प्रदान करने के लिए 
अपने सुख चैन त्याग कर देता है 
अपना सम्पूर्ण ज्ञान अनुभव
 शिष्य पर उड़ेल देता है 
                 माता पिता अपने बच्चों के लिए
 कितने त्याग करते है 
तब जाकर संतानो का
 जीवन निखर पाता है
 बीज मिटटी में दब कर 
अपने अस्तित्व को पूर्ण रूप से
 मिटा कर एक पौधे को अंकुरित करता है
 जो समय के साथ घना और छायादार
 फलो से भरा वृक्ष बन जाता है
 यदि बीज यह तय कर ले कि
 वह अपने अस्तित्व को बचाकर रखे तो
 कभी भी वृक्ष रूपी विशालता 
उसके भीतर से प्रकट नहीं हो पाएगी
 त्याग से महान लक्ष्य प्राप्त किये जा सकते है
 महान पुरुषो का जीवन देखे तो
 किसी ने देश और समाज के 
उत्थान के  लिए अपने  मूल्य वान  समय का 
किसी ने रिश्तों का 
किसी सुखो का 
तो किसी ने स्थान और धन सम्पदा का
 त्याग किया है समय आने पर
 वे प्राणों का त्याग करने से भी नहीं चूके है

Friday, February 5, 2016

मित्रता

मित्रता मानवीय रिश्तों का अनमोल उपहार है
मित्रता लिंगभेद उम्रभेद से परे होती है
बुजुर्ग व्यक्ति की मित्रता तरुण से हो सकती है
बशर्ते उनमे वैचारिक सामीप्य हो
एक सच्चा मित्र वह है जिससे व्यक्ति अपने मन की बात को निर्भीकता से कह सके
सच्चा मित्र वह है जो अपने मित्र की कमजोरियों को जानने के बावजूद उसका गलत फायदा न उठाये
एक अच्छा मित्र गुरु मार्ग दर्शक भ्राता की भूमिका भी निभाता है मित्रता में सद गुणों का अत्यधिक महत्व होता है दुर्गुणों से भरा मित्र पतन की राह पर ले जाता है स्वार्थी व्यक्ति कभी अच्छा मित्र नहीं हो सकता
कर्ण जैसा सदगुणी मित्र ने जहा दुर्योधन के जैसे दुर्गुणी मित्र की प्राण रक्षा के लिए 
बलिदान स्वयं का दे दिया
वही दुर्योधन जैसे स्वार्थी मित्र ने
 कर्ण को अपने स्वार्थ पूर्ति का साधन बना लिया मित्रता और रिश्ते समान स्तर पर अधिक निभते है ऐसे कई उदाहरण मिल जायेंगे 
जो किसी जमाने में अच्छे मित्र थे 
सामाजिक और आर्थिक स्थिति में 
बदलाव के कारण मित्र नहीं रहे
ऐसा सिर्फ स्वार्थ भावना के कारण ही हुआ 
मित्र वह है जो अपने मित्र को 
निराश और अवसाद से बाहर निकाल दे 
मित्र वह है जो मित्र को नई दृष्टि प्रदान करे
मित्र वह है व्यक्ति को आत्मबल प्रदान करे 
परिश्रम हेतु प्रेरित करे 
मित्र वह है जो सहायता करे 
पर उसे उपकृत करने का अहसास न होने दे

Tuesday, February 2, 2016

समय और सफलता

कुछ लोग का समय काटे नहीं कटता है
कुछ लोगों के पास समय का अभाव होता है
परन्तु समय का वास्तविक अभाव
 बहुत कम लोगो के पास होता है
समय के अभाव का रोना अक्सर वे लोग रोते है
जो समय का सबसे अधिक दुरुपयोग करते है
बीता हुआ समय कभी नहीं आता है
बुध्दिमत्ता यही है कि 
बीते हुए समय का अफ़सोस न किया जाए और वर्तमान का सही उपयोग किया जाए 
समय का समुचित उपयोग 
सभी लोग नहीं कर पाते है
व्यक्ति अपने व्यस्तता के पलो से भी 
समय चुरा सकता है 
समय की यह चोरी सीमित समय में 
व्यक्ति को कार्य करने में सक्षम बनाती है 
समय कभी एक सा नहीं रहता
 समय की गति जिसने पहचान कर 
सफलता हेतु जिसने रणनीति बनाई है 
सफल होकर उस व्यक्ति ने ही मंजिल पाई है
 समय को कोसने से कोई फ़ायदा नहीं है
समय को कोसने वाले व्यक्ति 
अपने दुर्भाग्य को आमंत्रित करते है
 समय से सामन्जस्य स्थापित करना एक कला है 
धन कमाया जा सकता है 
पर समय कमाया नहीं जा सकता है 
समय का मात्र सद उपयोग किया जा सकता है
 समय का सद उपयोग कर 
सुनहरा भविष्य बनाया जा सकता है 
अच्छे समय को याद कर वर्तमान में दुखी होना 
और अच्छे वर्तमान में 
बुरे समय की याद में डूबे  रहने से 
कोई फायदा नहीं है यह प्रवृत्ति मात्र 
अवसाद को जन्म देती है 
धीरे धीरे मनोरोग का कारण बन जाती है

Saturday, January 30, 2016

जन्म मरण और महानता

जन्म मरण जीवन का शाश्वत सत्य है
यह घटना हर व्यक्ति के जीवन में घटित होती है
किसी व्यक्ति का जन्म कहा हो ?
कैसे हो?
 यह कोई व्यक्ति स्वयं निर्धारित नहीं कर सकता 
परन्तु जन्म लेने के बाद 
व्यक्ति अपने शुभ और महान कर्मो से 
अपने जन्म को सार्थक बना सकता है 
असल में ऐसे सार्थक जीवन के जन्म को ही याद रखा जाता है ऐसे व्यक्तियों जन्म दिवस को उत्सव के रूप इसलिए नहीं मनाया जाता कि
वह विशेष कुल गौत्र में पैदा हुआ
 अपितु इसलिए मनाया जाता है कि 
वह कितनी विषम परिस्थितियों मे जीकर भी 
उसने विशेष और सराहनीय 
और समाज उपयोगी कार्य किये 
इसलिये महान व्यक्ति अपना जन्मदिवस 
स्वयं नहीं मनाते
 समाज याद करता है ठीक उसी प्रकार से मरण 
सुनिश्चित होने पर भी
 व्यक्ति पवित्र उद्देश्य के लिए 
जीवन का बलिदान देता है 
तो उसे शहीद कहा जाता है 
परन्तु जितना महत्वपूर्ण जीवन का बलिदान होता है उतना ही महत्वपूर्ण 
समाज और देश के लिए 
तिल तिल कर जीना होता है
 महान व्यक्तियो के जीवित रहते
 उनकी विशेषताओ से समाज परिचित नहीं हो पाता है लेकिन पूरा जीवन जी लेने के बाद 
उनके द्वारा जिन महान विचारो और प्रकल्पों का बीजारोपण किया गया था 
अंकुरण होने पर समाज ऐसे व्यक्तियो को 
महापुरुष के रूप में प्रतिष्ठित करता है