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Monday, March 7, 2016
शिवरात्रि
Saturday, March 5, 2016
अकर्मण्ये साधिकारस्ते माँ फलेषु कदाचन
कर्मशील लोग कर्म को पूजा मानते है
कोई सा भी काम उनको दे दो
इसी विचार धारा से प्रेरित हो
बड़े बड़े विषयो पर लंबे लंबे व्याख्यान
Saturday, February 27, 2016
अकर्मण्यता का निवारण एवम उपाय
कही ज्यादा है ।
अकर्मण्य व्यक्ति अकारण
थकान का अनुभव करता है
वह कितना भी विश्राम कर ले
Friday, February 26, 2016
परीक्षा का दौर
परन्तु कृत्रिम रूप से रचा गया यह
परीक्षार्थियो को कमजोर बना रहा है
Thursday, February 25, 2016
दृष्टिकोण
बात केवल समझने की है हो सकता है जिसे हम पागल समझते है वो अपनी धून में मगन कोई ज्ञानी हो और जिसे हम ज्ञानी माने बैठे है वो कोई धुर्त हो जिसने रटंत विद्या सिद्ध कर रखी हो और विद्वता का छद्म आडंबर ओढ रखा हो
यह अंतर बड़ा ही सूक्ष्म होता है
अंतर केवल दृष्टिकोण का है....
यह भी संभव हे की जिसे हम आज सुख मान रहे हे वो निकट भविष्य में असंतोष देने वाली क्षणिक मृगतृष्णा हो और जिसे हम आज दुखः समझ रहे हे वो दुःख के रूप में वो गुरू हो जो हमारे भविष्य को सँवारने के लिए हमारा वर्तमान में तांडन कर रहा है जैसे कोई कुम्हार घड़ा बनाने के लिए चक्के पर उसे घुमाता हे उसे पीटता है और अंत में वही घड़ा अपने में शीतल जल धारण कर लोगों को जीवन देकर पूजनीय बन जाता है
इस अंतर को समझना हम पर निर्भर करता है और यह भी की हम उस अंतर को समझना चाहते भी हे या नहीं
ये एक फाईन लाइन होती हे जो सत् - असत् में भेद करती है हमारा दृष्टिकोण जितना समग्र होगा हमारे लिए उस अंतर को देख पाना उतना ही सरल होगा
Saturday, February 20, 2016
स्मार्ट सिटी के बीच भिक्षा वृत्ति
वे भिखारी जो नदियो के पावन घाटो पर
Friday, February 19, 2016
सार्वभौमिक नियम भाग - 1
भौतिक का एक सार्वभौमिक नियम है जो पूरे ब्रह्मांड पर एक समान लागू होता है वह नियम है Gravity यानी गुरुत्वाआकर्षण का नियम और यह नियम कहता है कि Space अर्थात् अंतरिक्ष में जिस का भार (सघनता) जितना अधिक होगा उसका गुरुत्वाकर्षण बल उतना ही अधिक होगा और गुरुत्वाकर्षण बल का अपने से लघु को अपनी और आकर्षित करना ही इसकी विशेषता है
लघु इस आकर्षण में फस कर बंध कर या यह कहना भी गलत नहीं होगा के स्वयं अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए बाध्य हो कर लघु का अपने से महान की सुरक्षा
में बंधकर उसकी सुरक्षित कक्षा में उसकी परिक्रमा करता रहता है वह भलीभाँति जानता है कि वह इस सुरक्षा के बिना इस विशाल अंतरिक्ष
में लक्ष्य विहीन भटकता पिन्ड मात्र बन कर रह जायेगा अभी उस का कोई परिचय तो है
उदाहरण के लिए जैसे हमारा सौर मंडल -
हमारे सौर मंडल का केन्द्र हमारा महान सूर्य है जो हमे उष्मा , प्रकाश, ऊर्जा और जीवन देता है उसकी महानता के आगे हम अर्थात् पृथ्वी और सौर परिवार के अन्य सभी सदस्य लघु है हम इसकी कृपा पर आश्रित है हम इसके कर्तग्य है , इस बात का ज्ञान किसी भी वैज्ञानिक परिकल्पना और विशाल वैज्ञानिक ब्रह्मांडिय टेलिस्कोप के आविष्कार से भी पहले से पहले हमारे ज्ञानी मुनि पुर्वजो को था जिन्होंने सूर्य को भगवान के रूप में पूजा व सूर्य को जल चढ़ाने की परम्परा हमें विरासत में दी ताकि हम अपने जीवनदाता काे धन्यवाद ज्ञापित कर सके
शेष भाग ......



