जीवन में जितनी ऊँचाई सार्थकता रखती है
उतनी गहराई सार्थकता रखती है
व्यक्तित्व में जितनी ऊँचाई आवश्यक नहीं
उतनी गहराई आवश्यक है
बिना गहराई लिए ऊँचा लंबा व्यक्ति हो
व्यक्तित्व हो या ईमारत उसका आधार कमजोर होता है
गहरा चिंतन ,गहरा सोच ,गहरी योजनाये ,गहरी भावनाए ,
व्यक्ति को शांत और सौम्य बनाती है
जबकि व्यक्तित्व का उथलापन व्यक्ति को चंचल और और अस्थिर बनाता है
जीवन में समग्रता प्राप्त करने के लिए
कठोर परिश्रम के साथ विषय तथा तथ्य के प्रति गहरा अध्ययन अनिवार्य है
भक्ति हो ,प्रीती हो ,या नीति हो उसमे गहराई से डूब जाना होता है
इसलिए गहराई से डरने की नहीं सवरने की आवश्यकता है
समग्र गहराईया जब हम अपने व्यक्तित्व में समा लेते है
तो हम स्वयं को सामर्थ्यवान और सशक्त बना लेते है
आशय यह है की सागर की तरह गहरा और सुधीर बनो
उतनी गहराई सार्थकता रखती है
व्यक्तित्व में जितनी ऊँचाई आवश्यक नहीं
उतनी गहराई आवश्यक है
बिना गहराई लिए ऊँचा लंबा व्यक्ति हो
व्यक्तित्व हो या ईमारत उसका आधार कमजोर होता है
गहरा चिंतन ,गहरा सोच ,गहरी योजनाये ,गहरी भावनाए ,
व्यक्ति को शांत और सौम्य बनाती है
जबकि व्यक्तित्व का उथलापन व्यक्ति को चंचल और और अस्थिर बनाता है
जीवन में समग्रता प्राप्त करने के लिए
कठोर परिश्रम के साथ विषय तथा तथ्य के प्रति गहरा अध्ययन अनिवार्य है
भक्ति हो ,प्रीती हो ,या नीति हो उसमे गहराई से डूब जाना होता है
इसलिए गहराई से डरने की नहीं सवरने की आवश्यकता है
समग्र गहराईया जब हम अपने व्यक्तित्व में समा लेते है
तो हम स्वयं को सामर्थ्यवान और सशक्त बना लेते है
आशय यह है की सागर की तरह गहरा और सुधीर बनो
