मरना एक न एक दिन सभी को है
परंतु जीवन और मृत्यु उद्देश्य पूर्ण हो तो
उसका जीना सार्थक है मरना भी सार्थक है निरुद्देश्य जीवन और दुर्घटना से हुई मृत्यु में
कोई अंतर नही है
कोई परोपकार समाज सेवा
देश धर्म के लिए जीवन जीता है तो
कोई मात्र स्वार्थ पूर्ति के लिए जीता है
कोई बीमार होकर रुग्ण शैय्य्या पर
दुर्घटना में घायल होकर मरता है
तो कोई देश की सीमा पर लड़ते लड़ते है
अपने कर्तव्य की पूर्ति में मरता है
उसे इतिहास याद रखता है
डरना मना है उस मृत्यु से जो आकस्मिक दुर्घटना से हो सकती है कभी कभी दुर्घटनाये होती नही आमंत्रित की जाती है आकस्मिक हुई दुर्घटना से हुई मृत्यु उद्देश्य पूर्ण जीवन का समापन है निरुद्देश्य जीने वाले को इससे कोई फर्क नही पड़ता ।कई बार जीवन भी मृत्यु से भयावह हो सकता है ऐसा तब होता है जब व्यक्ति का आत्म विश्वास बुरी तरह से टूट जाता है परस्पर रिश्तो का विश्वास चकनाचुर हो जाता है व्यक्ति की प्रतिष्ठा और धन नष्ट हो जाता है व्यक्ति का चरित्र समाप्त हो जाता है व्यक्ति विवेक और ज्ञान शून्य हो जाता है तब ऐसा व्यक्ति आत्मघाती कदम उठा लेता है और यही आत्महत्या का कारण भी होता है
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Tuesday, December 4, 2018
जीवन और मृत्यु
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