परजीवी वह प्राणी है जो अपने जीवन के लिए दूसरो से पोषण प्राप्त करता है पराश्रयी होकर वह स्वयं के अस्तित्व के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है
शिथिलता आलस्य इसके प्रमुख लक्षण होते है स्वभिमान शून्य होने के साथ साथ निर्लज्जता इसके आभूषण है दुसरो का कमाया खाना इसका नैतिक दायित्व होता है सामान्य रूप से परजीवी आशय हम वनस्पति में अमरबेल और जन्तुओ में जोंक से समझते है परन्तु मानव समाज में व्याप्त परजीवी की और किसी का ध्यान तक नहीं जाता ।परजीवी व्यक्ति की एक प्रमुख विशेषता यह होती है कि उन्हें छोटी छोटी बातो का बहुत बुरा लगता है पर कुछ ही समय बाद वे पुनः सामान्य अवस्था में आ जाते है दिल पर किसी बात को नहीं लगाते ।सरकारी स्तर पर भी ऐसे परजीवियों के पोषण संवर्धन की योजनाये विद्यमान है
जिसमे परजीवी हितग्राहियो का शासकीय स्तर पर यथोचित ध्यान रखा जा रहा है अलग अलग श्रेणियों में अलग पुरूस्कार तक घोषित किये जा रहे है परजीवियों की अनगिनत नस्ले अब निखर आई है
उनकी कोई नस्ल विलुप्त होने की संभावना भी नहीं है
परजीवियों के रूप में जीवित रहने के लिए लंबे अभ्यास की आवश्यकता होती है सीमित खर्च में पारिस्थितियो से तालमेल जो बिठाना पड़ता है परजीविता एक विज्ञान के रूप विकसित होता जा रहा है इसमें जितना शोध किया जाय उतना कम है अब तो परजीविता के हायब्रिड संस्करण भी दिखाई देने लगे है
बस उन्हें हम देख सके पहचान सके ।
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Sunday, October 25, 2015
परजीवी
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