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Friday, October 9, 2015

चित्त में पलते संकल्प और विकल्प

जिस प्रकार मन चंद्रमा का प्रतीक और सूर्य बुध्दि का प्रतीक होते है |उसी प्रकार हमारा चित्त जो मन और बुध्दि से सूक्ष्म पर व्यापक होता है |आकाश का प्रतीक होता है चित्त में चिंतन निवास करता है |चित्त में आत्मा से जुड़े संस्कार प्रवाहित होते रहते है |रात्रि में जिस प्रकार आकाश में तारे टीम टिमाते है ठीक वैसे ही हमारे चित्त में संकल्प और विकल्प उठते रहते है
| जब हम ध्यानस्थ होते है तो हमारा प्रयास रहता है कि इन संकल्प विकल्पों से नियंत्रित विचारो को रोक कर एकाग्र होकर चित में विराजित परम तत्व के सामीप्य का अनुभव करना |दिन के उजाले में तारे दृष्टिगत नहीं होते है |वैसे ही भाग दौड़ भरी व्यस्तता में हमे हमारे मन में पलने वाले संकल्प विकल्प दिखाई नहीं देते है इसलिए हम चित्त में प्रविष्ट करने के लिए रात्रि के सामान शांत वातावरण की तलाश करते रहते है हमे एकांत अच्छा लगता है |