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Tuesday, July 2, 2013

बाल लीला

बाल जिन्हें संस्कृत में केश कहते है की लीला बहुत ही निराली  है 
जिन व्यक्तियों के सिर पर अक्सर  दायित्वों को बोझ नहीं होता 
उनके बालो में सफेदी नहीं आ सकती बहुत से व्यक्ति ऐसे भी 
होते है जो अकारण ही बालो में सफेदी के शिकार हो जाते है 
ऐसे व्यक्तियों के लिए कहा जाता है की उन्होंने बाल धुप में सफ़ेद किये है 
कुछ लोग अज्ञात कारणों से  केशविहीन अवस्था में पहुँच जाते है 
उनके बारे में सुधी  जन यह कहते हुए दिखाई देते है की उनका भाग्योदय हो चुका है परन्तु किस मात्रा में ऐसे केश विहीन सज्जन का भाग्य उदय हुआ यह तो वे सज्जन ही बता सकते है समस्या वहा आकर खड़ी  होती है 
जबकि ऐसे अल्प केशधारी सज्जन नाई की दूकान पर केश कर्तन कार्य हेतु जाते है एक केश की अल्प मात्रा दूसरी और बालो के कर्तन  की पावन 
परम्परा की निर्वहन की चुनौती दोनों के बीच केश कर्तनालय का स्वामी धर्म संकट में खडा नजर आता है की वह कौनसे बाल काटे और कौनसे नहीं फिर भी ज़रा सी असावधानी अल्प केश धारी सज्जन के क्रोध का कारण बन जाती है बेचारा केश कर्तन  कार बेबस  और असहाय नजर आता है अनावश्यक क्रोध का भाजन बन जाना उसकी नियति बन जाती है