परोपकार की महिमा शास्त्रों ने गाई है
परोपकारी प्रवृत्ति प्रक्रति ने पाई है
परोपकारी व्यक्तित्व ने यश कीर्ति पाई है
परोपकारी भावना ने ही यह सृष्टि सजाई है
परोपकार जीवन चेतना का मन्त्र है
परोपकार है तो जीवित जनतंत्र है
परोपकारी भाव नदी, वन, धरती ने पाया है
परोपकारी नभ है जिसने अमृत बरसाया है
परोपकार में सच्चा सुख है बाकी सब माया है
परोपकार वहा नहीं जहा मिथ्याभिमान है
परोपकार वहा नहीं जहा यश कीर्ति की चाह है
परोपकारी सरोवर में निर्मल नीर अथाह है
परोपकार में परेशानिया नहीं ,समाधान की राह है
परोपकार ही सच्ची समाज सेवा है
परोपकार गंगा ,जमुना है सिन्धु ,रेवा है
परोपकारी भावना से ओत -प्रोत पर्वत हिमालय है
परोपकारी ध्वनी से युक्त बजते शंख
महकते देवालय है
परोपकारी देव शिव है श्री कृष्ण ,बलराम है
परोपकारी बनो कहते आये पुरुषोत्तम श्रीराम है
परोपकार जीवन का जल है भक्ति निष्काम है
रहते है इस भावना में ही चारो धाम है

