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Friday, December 21, 2012

कुशल प्रशासन और अन्वेषण दृष्टि


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प्रशासन तथा प्रबंधन के क्षेत्र में अक्सर यह देखा जाता है
जो कर्मचारी कार्य के प्रति समर्पित रहते है
उन्हें और अधिक दायित्व सौप दिए जाते है
जो कर्मचारी काम से जी चुराते है उन्हें
महत्वहीन मान कर प्रबंधन ऐसे स्थान पर नियुक्त कर दिया जाता है
जिससे परिणामो पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता हो
परन्तु प्रशासन का यह तरीका क्या सही है ?
बिलकुल नहीं
इस प्रक्रिया से तो निकम्मे कर्मचारी
और भी अधिक आलसी हो जाते है
और कर्मठ कर्मचारी निराश और हतोत्साहित
कुशल प्रशासक और प्रबंधक तो वह व्यक्ति है
जो अकर्मण्य लोगो से उनके अनुरूप बेहतर काम ले सके
और कर्मठ व्यक्तियों को प्रोत्साहन देते हुए
उन्हें निरंतर कीर्तिमान स्थापित करने हेतु प्रेरित कर सके
प्रशासक और प्रबंधक की कुशलता इसमें नहीं है
की वह कर्तव्य परायण लोगो से ही कार्य लेता रहे
और निकम्मों को स्वच्छंद छोड़ दे
बल्कि उसकी कुशलता इसमें निहित है की
वह न काम करने वालो से काम ले सके
इसे ही प्रशासनिक दक्षता कहा जा सकता है
क्षमतावान प्रशासक नितांत अनुपयोगी व्यक्ति में भी
उसमे छुपी निहित क्षमता की पहचान कर क्षमता के अनुरूप कार्य ले लेता है
अक्षम प्रशासक को प्रत्येक व्यक्ति में 
किसी न किसी प्रकार की कमी दिखाई देती है
परिणाम स्वरूप वह किसी भी कर्मचारी का उचित उपयोग नहीं कर पाता है
यह उल्लेखनीय है कि कोई भी व्यक्ति अनुपयोगी नहीं होता
प्रत्येक व्यक्ति में किसी न किसी प्रकार कि क्षमता विद्यमान होती है
यह अवश्य है कि व्यक्ति कि क्षमता को पहचानने हेतु
प्रशासकीय अन्वेषण दृष्टि होनी चाहिए