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Friday, October 28, 2016

लक्ष्य

सौंदर्य उसके लिए है
जो दृष्टि समन्न हो
वैचारिक दृष्टि से नहीं विपन्न  हो
आनंद उसके लिए है
जिसके भीतर अमृत तत्व है 
सकारात्मक सोच हो रमा हुआ सत्व है 
लक्ष्य उनके लिए 
जिन्हें दिखते उतुंग शिखर हो 
बहता हो श्रम सीकर प्रतिभा प्रखर हो
ज्ञान उसके लिए जिन्हें जिज्ञासा हो
सदा रहे अतृप्त अनंत पिपासा हो 
जीवन उसके लिए जो गतिमान हो 
रचते रहे निरंतर अनेक प्रतिमान हो

माँ शारदा का वाहन हंस क्यों है ?

हंस  माँ शारदा का वाहन  है 
परन्तु माँ शारदा ने हंस को ही 
वाहन के रूप में क्यों चुना 
 यह विचारणीय प्रश्न  है
हंस का स्वभाव होता है 
वह दूध  में जल होने पर दूध को पी लेता है 
जल को  छोड देता है 
कंकड़ और मोती के मिश्रण में से 
मोती को चुग लेता है कंकड़ को छोड़ देता है 
सत्पुरुषों का लक्षण यही होता है कि 
 सत  और असत्य का भेद कर
 असत्य  छोड कर सत्य को ग्रहण का लेते है 
ज्ञान और अज्ञान में भेद कर 
अज्ञान को छोड़ ज्ञान को ग्रहण कर लेते है 
सत्पुरुषों का आचरण उज्ज्वल  होता है 
 इसलिए हंस का रूप भी धवल होता है
माँ शारदा उसी व्यक्ति की बुध्दि में 
विराजमान होती है 
हंस के समान सत  और असत  में
 भेद करने में समर्थ होता है 
ऐसे व्यक्ति की बुद्धि नीर क्षीर विवेक से युक्त होने से उसे सहज ही आविष्कारक दृष्टि प्राप्त होती है 
हंस के समान कल्पना और सृजना के पंख 
उसे उपलब्ध होते है