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Thursday, September 19, 2013

सेवा निव्रत्ती और संकट

लक्ष्मीनारायण जी के अत्यंत दुर्बल स्वास्थ्य के बावजूद उन्हें एक तारीख को अपनी पेंशन  लेने जाना पडा ,कड़कती हुई सर्दी में सुबह सुबह जाने के कारण उन्हें शरीर  में लकवा मार गया लक्ष्मीनारायण  जी ने जीवन भर शासकीय शिक्षक की नौकरी की सेवा निवृत्ति के पश्चात वे अपने बेरोजगार और बालबच्चेदार पुत्र नरेश के साथ निवास कर रहे थे |नरेश जो विद्यार्थी जीवन में पढ़ाई में रूचि न रख अनावश्यक बातो में ध्यान देता था| रिश्तेदारों की सलाह मानकर लक्ष्मीनारायण जी ने नरेश का विवाह कर दिया तब से नरेश का एक मात्र उद्देश्य जनसंख्या वृद्दि में योगदान रह गया था| पढ़ाई अच्छी नहीं होने की वजह से नरेश की नौकरी भी नहीं लगी थी |कार्य के प्रति समर्पण के अभाव में लक्ष्मीनारायण जी के अथक प्रयास के बाद कोई व्यवसाय भी नहीं कर पाया था |ऐसे में पेंशन की आवश्यकता लक्ष्मी नारायण जी से अधिक नरेश और उसके परिवार को अधिक थी प्रत्येक माह की एक तारीख का इंतज़ार उसे सदा रहता था| संकट यह नहीं था की लक्ष्मीनारायण की स्वास्थ्य कैसे ठीक होगा परेशानी नरेश के सामने यह थी की लक्ष्मी नारायण जी के ठीक न होने पर और असमय दिवंगत होने पर नरेश और उसके परिवार का भरण पोषण कैसे होगा |