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Tuesday, February 13, 2018

शिव शंकर

शिव शंकर का ध्यान करो भीतर करो प्रवेश
कुदरत से श्रंगार धरे  शिव का अदभुत वेश

शिव जी शक्ति देत रहे भक्ति और आनंद
सुरभित आस्था होत रही महकी आती गंध

शिव की पुत्री साथ रही साथ रहे सुख चैन
रेवा मैय्या बांट रही करुणा निश्छल प्रेम

मुक्ति की मुस्कान रहे ज्योति पुंज है जीव
भक्ति जिसके पास रही पाया उसने शिव

शिव शक्ति दोउ साथ रहे साथ रहे सब जीव
पूजित शक्ति होत रही वंदित होते शिव

जीवन सारा बीत गया बीत गई कई रैन
शिवरात्रि को खूब मिला व्याकुल मन को चैन

शिव श्रध्दा से जीत मिली  प्रीत भरी मुस्कान
हर निश्चय को लक्ष्य मिले शिव जी दो वरदान

शिव व्यापत हर रूप रहे धूप रहे और छाँव
दुर्बल मन की पीर हरो डग मग होती नाव


Saturday, October 7, 2017

व्यक्ति की अवस्था

मन जब अबोध और मासूम होता है तब बच्चा कहलाता है 
बच्चा जैसे जैसे समझने लगता है 
सांसारिक जटिलताओं से निपटने  के लिए 
कुटिलताओ  सीखने की कोशिश में बच्चा किशोर हो जाता है
किशोरवय में कई भटकाव होते है 
भटकाव में व्यक्ति सम्हाल जाए तो जीवन संवर जाता है 
संघर्षो की राह पकड़ किशोर जीवन की ऊंचाइयों को पाता है 
भटकाव में व्यक्ति भटक जाए बहक जाए तो वह पतित होकर 
अनैतिक साधनो को अपनाने लगता है अपराधी बन जाता है 
कोई भी व्यक्ति जो मासूम और अबोध और बच्चा होता है 
कब अपराधी बन जाए उसे पता ही नहीं च लता 
अपराध को ही अपनी नियति मान लेता है 
किशोर अवस्था में जो जैसा बन गया जैसा ढल गया 
वैसा ही उसका जीवन मुकाम पाता है
कोई व्यक्ति कठिनाइयों से कमजोर 
तो कोई व्यक्ति कठिनाईयो में निखार जाता है
कोई व्यक्ति सुविधाओं में सम्बल  पाता है 
तो कोई व्यक्ति सुविधाओं में दुर्बल हो जाता है
अभावो में किसी की प्रतिभा निखर जाती है 
तो किसी व्यक्ति की प्रतिभा अभावो में दम तोड़ देती है
जीवन में समताये कम है विषमताएं ज्यादा है 
कभी परिस्थितिया व्यवस्थाएं बन जाती है 
तो कभी परिस्थितियां विवशताये बन जाती है 

Thursday, September 21, 2017

नंदी

श्रावण के सोमवार पर शिव मंदिर में भक्तो की भीड़ लगी हुई थी | दर्शन कर प्रसाद चढाने के लिए लम्बी लम्बी लाइने लगी हुई थी | बड़ी मुश्किल से नंबर आया तो एक भक्त ने भगवान् शिव के दर्शन किये 
और शिव के समक्ष विराजमान नंदी  नमन किया और नंदी के समीप बैठ कर शिव के समक्ष समर्पण भाव से ध्यान किया और स्वयं कृत  कृत्य हुआ | बाहर आने पर जो प्रसाद लेकर आया था उसे बाहर खड़े सांड ने मुंह लगाया तो भक्त महाराज को बर्दाश्त नहीं हुआ | वे कैसे एक पशु को पवित्र प्रसाद को मुंह लगाने देते सांड को मारने के दौड़े सांड बेचारा भूखा प्यासा बेहाल मार खाते हुए भागा | प्रश्न एक चुभता रहा मन को की मंदिर के भीतर विराजमान पत्थर के नंदी जो भक्त कितनी श्रध्दा के साथ पूज रहा था वही भक्त मंदिर के बाहर प्रत्यक्ष रूप से खड़े | नंदी को पहचान नहीं पाया भला ऐसे भक्तो को शिव का आशीष कहा से प्राप्त होता

Wednesday, April 12, 2017

सौन्दर्य और वैभव

सौन्दर्य सम्पन्नता  में ही नहीं होता सादगी में भी होता है सीधा सच्चा ग्राम्य परिवेश प्रकृति का सामीप्य पा अधिक आकर्षक लगता है वैभव के मानदंड समृद्धि ही नहीं होते इतिहास उज्ज्वल हो तो प्राचीन किले की टूटी दीवारे और जींर्ण शीर्ण महल भी अपनी वैभव गाथा कहते है अन्यथा तो संगमरमर से बने साफ़ सुथरे कई राजसी महल अपनी कलंकित ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के चलते वैभव खो चुके है और पांच सितारा होटलों में बदल कर विदेशियो के सत्कार में पलक पावड़े बिछा कर अपना वैभव तलाश रहे है