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Sunday, July 21, 2013

रुचि

  रूचिया  जिसे शौक भी कहते है 
 व्यक्तित्व का दर्पण होती है
ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसे कोई रूचि नहीं हो
यह संभव है की रुचियों के अच्छे बुरे प्रकार हो सकते है
साक्षात्कार की प्रक्रिया में साक्षात्कार कर्ता प्रत्याशी से
 रुचियों के बारे में इसलिए पूछते है
रुचियों से व्यक्ति के बारे में यह तथ्य ज्ञात किया जा सकता है की
किसी व्यक्ति की  मानसिकता किस स्तर की है
व्यक्ति का सकारात्मक है अथवा नहीं 
रुचियों के आधार पर ही यह निर्धारित किया जा सकता है की
व्यक्ति में रचनात्मक प्रवृत्ति है या नहीं 
साहित्य कला संगीत में रूचि रखने वाला व्यक्ति संवेदना
से परिपूर्ण  भावुक  और रचनात्मक होता है 
खेल और व्यायाम में रूचि रखने वाला व्यक्ति
 स्वास्थ्य के प्रति जागरूक सक्रीय रहने वाला व्यक्ति होता है 
रूचि में किये जाने वाले कार्य में 
व्यक्ति को पूरी सफलता प्राप्त होती है
 अरुचि से किये जाने वाला अभ्यास हो या कोई कार्य 
समय और श्रम अधिक लगने के बावजूद व्यक्ति को 
वांछित फल प्रदान नहीं करता