
गांधी जी के नाम पर हुई वोटो की लूट
स्वदेशी से करे घृणा ,विदेशी को छूट
उपभोक्ता बाजार में विज्ञापन का रोग
परदेशी प्रसन्न हुए ,स्वदेशी को शोक
परदेशी तो पुष्ट हुए स्वदेशी कंगाल
ओद्यौगिक व्यवस्था का यही हुआ है हाल
वित्त व्यवस्था देश की हो गई है विकराल
बची खुची को लुट रहे ये परदेशी लाल
हिन्दुस्तानी माल है हिन्दुस्तानी श्रम
स्वदेशी की ओट में विदेशी उपक्रम
स्वदेशी से करे घृणा ,विदेशी को छूट
उपभोक्ता बाजार में विज्ञापन का रोग
परदेशी प्रसन्न हुए ,स्वदेशी को शोक
परदेशी तो पुष्ट हुए स्वदेशी कंगाल
ओद्यौगिक व्यवस्था का यही हुआ है हाल
वित्त व्यवस्था देश की हो गई है विकराल
बची खुची को लुट रहे ये परदेशी लाल
हिन्दुस्तानी माल है हिन्दुस्तानी श्रम
स्वदेशी की ओट में विदेशी उपक्रम