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Wednesday, March 25, 2026

आत्म सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा

आत्मसम्मान  प्रत्येक व्यक्ति का होता है l व्यक्ति का जब आत्म सम्मान आहत होता है तो वह गहन निराशा से ग्रस्त हो जाता है  l व्यक्ति की सामाजिक या आर्थिक हैसियत से उस व्यक्ति के आत्मसम्मान के स्तर का अनुमान नहीं लगाया जा सकता l बल्कि यह भी संभव है कि किसी गरीब व्यक्ति का किसी धनाढ्य व्यक्ति से अधिक आत्म सम्मान हो l 
   परजीवी परावलंबी और नैतिक दृष्टि से पतित और भ्रष्ट व्यक्ति में आत्मसम्मान का अभाव होता है  l आत्मसम्मान से  परिपूर्ण व्यक्ति स्वालंबन का राही होता है l आत्मसम्मान से युक्त व्यक्ति अल्प साधनों में जीवनयापन करने वाला होकर  मितव्ययी होता है l  
   सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित व्यक्ति आत्मसम्मान से परिपूर्ण हो यह आवश्यक नहीं l व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा बाह्य आवरण है l बाह्य आवरण छद्म भी हो सकता है l आत्म सम्मान का संबंध व्यक्ति के भीतर स्थित आत्म भावना से होता है l इसलिए ऐसा कहते है कि व्यक्ति दूसरों की नजर से गिर जाए पर खुद की नजर से नहीं गिरना चाहिए l 
      जब व्यक्ति खुद की नजर से गिर जाता है तो  वह आत्मविश्वास से विहीन हो जाता है l ऐसा व्यक्ति बाहर से स्वयं को कितना भी धार्मिक तथा आदर्शवादी बताता हो वह भीतर से कमजोर मानसिकता वाला होता है उसमें आत्मबल नहीं होता l विपरीत परिस्थितियों में वह भीतर से टूट जाता है l इसलिए यह देखने में आता है तथाकथित कई प्रतिष्ठित लोग आत्म हत्या कर लेते है l

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