Total Pageviews

93892

Friday, October 28, 2016

लक्ष्य

सौंदर्य उसके लिए है
जो दृष्टि समन्न हो
वैचारिक दृष्टि से नहीं विपन्न  हो
आनंद उसके लिए है
जिसके भीतर अमृत तत्व है 
सकारात्मक सोच हो रमा हुआ सत्व है 
लक्ष्य उनके लिए 
जिन्हें दिखते उतुंग शिखर हो 
बहता हो श्रम सीकर प्रतिभा प्रखर हो
ज्ञान उसके लिए जिन्हें जिज्ञासा हो
सदा रहे अतृप्त अनंत पिपासा हो 
जीवन उसके लिए जो गतिमान हो 
रचते रहे निरंतर अनेक प्रतिमान हो

No comments:

Post a Comment